पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और भूमिहीनता से अटका गरीबों का घर का सपना
प्रधानमंत्री आवास योजना के बावजूद पश्चिम बंगाल की झुग्गियों में गरीबों का पक्के घर का सपना अधूरा है। भ्रष्टाचार, भूमि की कमी और प्रशासनिक बाधाएं योजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर रही हैं।
राष्ट्रीय आवास मिशन के तहत देशभर में गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति इस लक्ष्य से काफी अलग दिखाई देती है। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के अंतर्गत जहां पूरे देश में गरीबों के लिए घरों के निर्माण में तेजी आई है, वहीं पश्चिम बंगाल की झुग्गी बस्तियों में आज भी बड़ी संख्या में लोग मूलभूत आवास सुविधाओं से वंचित हैं।
राज्य के कई हिस्सों में भूमिहीनता एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जिन परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है, वे इस योजना का लाभ पाने में सबसे ज्यादा कठिनाई झेल रहे हैं। इसके अलावा, कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आते हैं, जिनमें पात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए जाने या अवैध वसूली जैसे मामले शामिल हैं।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कई गरीब परिवार वर्षों से आवेदन करने के बावजूद अपने पक्के घर का इंतजार कर रहे हैं। झुग्गियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि कागजी प्रक्रिया और प्रशासनिक देरी के कारण योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
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विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है। साथ ही, भूमिहीन परिवारों के लिए विशेष प्रावधान किए बिना इस योजना का पूरा लाभ नहीं पहुंच पाएगा।
सरकारी स्तर पर भले ही आवास उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पश्चिम बंगाल में आज भी हजारों गरीब परिवार अपने “सपनों के घर” का इंतजार कर रहे हैं।
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