WHO प्रमुख बोले: संगठन से हटने के लिए अमेरिका ने जो कारण बताए, वे असत्य
WHO प्रमुख टेड्रोस ने कहा कि संगठन से हटने को लेकर अमेरिका के आरोप गलत हैं और यह फैसला अमेरिका समेत पूरी दुनिया की स्वास्थ्य सुरक्षा को कमजोर करता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने अमेरिका द्वारा WHO से हटने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार (24 जनवरी, 2026) को उन्होंने वॉशिंगटन द्वारा दिए गए कारणों को “असत्य” करार देते हुए कहा कि इस कदम से न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया कम सुरक्षित हो गई है।
टेड्रोस ने कहा, “दुर्भाग्य से अमेरिका के WHO से हटने के फैसले के लिए जो कारण बताए गए हैं, वे सही नहीं हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि WHO ने हमेशा अमेरिका सहित सभी सदस्य देशों के साथ उनकी संप्रभुता का पूरा सम्मान करते हुए सहयोग किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को एक संयुक्त बयान में घोषणा की थी कि अमेरिका औपचारिक रूप से WHO से बाहर हो गया है। उन्होंने WHO पर कोविड-19 महामारी के दौरान “कई विफलताओं” और “बार-बार अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करने” का आरोप लगाया था। हालांकि WHO ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि अमेरिका का हटना औपचारिक रूप से प्रभावी हो गया है।
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WHO ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एजेंसी ने महामारी के दौरान तेजी से और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध सभी जानकारियां साझा कीं और सदस्य देशों को सर्वोत्तम वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सलाह दी। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसने कभी मास्क, टीकाकरण या लॉकडाउन को अनिवार्य करने की सिफारिश नहीं की, बल्कि देशों को अपने नागरिकों के हित में स्वतंत्र निर्णय लेने का समर्थन किया।
WHO ने यह भी बताया कि अमेरिका ने 1948 में संगठन में शामिल होते समय यह शर्त स्वीकार की थी कि उसे हटने से पहले एक साल की सूचना देनी होगी और उस वित्तीय वर्ष के सभी बकाया भुगतान करने होंगे। अमेरिका पर फिलहाल करीब 26 करोड़ डॉलर का बकाया है।
टेड्रोस ने उम्मीद जताई कि भविष्य में अमेरिका फिर से WHO में सक्रिय भूमिका निभाएगा और तब तक संगठन सभी देशों के साथ मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य के अपने मूल मिशन पर काम करता रहेगा।
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