योग प्रशिक्षण के मानकीकरण के लिए डब्ल्यूएचओ और भारत की संयुक्त पहल
डब्ल्यूएचओ और भारत योग प्रशिक्षण के लिए वैश्विक मानक तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य योग प्रशिक्षकों की दक्षता बढ़ाना और अभ्यास में गुणवत्ता व एकरूपता सुनिश्चित करना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारत सरकार मिलकर योग प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य योग प्रशिक्षकों, प्रैक्टिशनर्स और पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर स्पष्ट दिशानिर्देश और दक्षता मानक तैयार करना है, जिससे योग की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना योग प्रशिक्षण पद्धतियों, अभ्यास की अवधि, पाठ्यक्रम संरचना और प्रशिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए मानकीकृत ढांचा तैयार करेगी। इसके तहत योग से जुड़े संस्थानों के लिए एक समान मानक लागू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि योग शिक्षा में भिन्नता कम हो और गुणवत्ता सुनिश्चित हो।
डब्ल्यूएचओ का मानना है कि योग एक प्रभावी स्वास्थ्य पद्धति है, लेकिन विभिन्न देशों में इसके प्रशिक्षण और शिक्षण में काफी असमानताएं हैं। भारत, जो योग का उद्गम स्थल है, इस प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहा है। सरकार चाहती है कि योग को वैश्विक स्तर पर एक वैज्ञानिक, प्रमाणित और मानकीकृत स्वास्थ्य साधन के रूप में बढ़ावा दिया जाए।
और पढ़ें: सेना के जवान की हत्या में 5 माओवादी आरोपियों के खिलाफ एनआईए का आरोपपत्र
इस पहल से न केवल योग प्रशिक्षकों की पेशेवर दक्षता बढ़ेगी, बल्कि स्वास्थ्य और वेलनेस उद्योग में योग का महत्व भी और मजबूत होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मानकों के लागू होने से योग को औपचारिक चिकित्सा प्रणाली के पूरक के रूप में मान्यता दिलाने में मदद मिलेगी।
और पढ़ें: आधुनिक युद्ध में ड्रोन की अहम भूमिका, नीति का हिस्सा बनना जरूरी: राजनाथ सिंह