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नंदन नीलेकणी कौन हैं? परीक्षा सुधारों के लिए बनी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की संभालेंगे कमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी देश के प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार बड़े कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो परीक्षा सुधारों को लेकर सुझाव देगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।

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कौन हैं नंदन नीलेकणी?

नंदन नीलेकणी देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं। वह आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं। उन्होंने वर्ष 1981 में एन. आर. नारायण मूर्ति, कृष गोपालकृष्णन, एस. डी. शिबुलाल, के. दिनेश, एन. एस. राघवन और अशोक अरोड़ा के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की थी।

नीलेकणी मार्च 2002 से अप्रैल 2007 तक इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहे। इसके बाद उन्होंने कंपनी के अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2017 में वह दोबारा इंफोसिस से जुड़े और कंपनी के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष बने।

वर्ष 2009 में उन्होंने इंफोसिस छोड़कर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यह जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन भाजपा के अनंत कुमार से हार गए थे।

टास्क फोर्स में शामिल अन्य सदस्य

परीक्षा सुधारों के लिए गठित इस टास्क फोर्स में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को भी शामिल किया गया है।

यह कदम हालिया नीट पेपर लीक विवाद और देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

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