VB-G RAM G योजना का राज्यों ने क्यों किया विरोध? जानिए क्या हैं नए नियम और विवाद
1 जुलाई से लागू होने वाली VB-G RAM G योजना में रोजगार 100 से 125 दिन होगा, लेकिन राज्यों की हिस्सेदारी 10 से 40 प्रतिशत होने पर कई राज्यों ने विरोध जताया है।
केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम-जी) 1 जुलाई से लागू होने जा रही है। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगी। हालांकि, इसके लागू होने से पहले ही कई राज्यों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 22 मई को इस नई योजना के मसौदा नियम जारी किए थे और सभी हितधारकों से एक महीने के भीतर सुझाव मांगे थे। सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाना है।
नई योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के गारंटीशुदा दिनों में किया गया है। अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह बदलाव ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत माना जा रहा है।
हालांकि, राज्यों का विरोध योजना की वित्तीय व्यवस्था को लेकर है। अभी तक मनरेगा के तहत कुल खर्च का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को वहन करना पड़ता था, जबकि नई योजना में इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। राज्यों का कहना है कि इससे उनके वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा और कई राज्यों के लिए इस अतिरिक्त खर्च का प्रबंधन करना कठिन होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी सकारात्मक कदम है, लेकिन यदि राज्यों पर वित्तीय बोझ अधिक बढ़ा तो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयां आ सकती हैं। यही कारण है कि कई राज्य सरकारें इस प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं और केंद्र से वित्तीय हिस्सेदारी पर पुनर्विचार करने की मांग कर रही हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार राज्यों की आपत्तियों पर क्या फैसला लेती है और नई योजना को किस रूप में लागू किया जाता है।
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