महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष में बढ़ सकती है फूट, कांग्रेस पड़ सकती है अलग-थलग: सूत्र
सूत्रों के अनुसार, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष के कई सांसद सरकार का समर्थन कर सकते हैं। इससे संसद में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार को उम्मीद है कि यदि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक संसद में पेश किए जाते हैं, तो विपक्ष के कई सांसद इनका समर्थन कर सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस संसद में अपेक्षाकृत अलग-थलग पड़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार फिलहाल मानसून सत्र में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (वन नेशन, वन इलेक्शन) विधेयक लाने की योजना नहीं बना रही है। हालांकि, परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अभी अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है।
सरकार की प्राथमिकता इस समय लंबित अध्यादेशों को संसद से पारित कराना है। इनमें सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी शामिल है। इस विधेयक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करना है।
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'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर क्या स्थिति है?
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पिछले वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था। बाद में इसे भारतीय जनता पार्टी के सांसद पी. पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था। समिति का कार्यकाल 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अवसरों पर 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की वकालत करते हुए कह चुके हैं कि इससे चुनावों पर होने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि सरकार इस विधेयक को जल्दबाजी में लाना चाहती है और विपक्ष की सहमति के बिना इसे पारित कराना आसान नहीं होगा।
कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार को विपक्ष के साथ चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार अपना प्रस्ताव स्पष्ट करे, उसके बाद विपक्ष अपना रुख तय करेगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर मतभेद
महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पिछले सत्र में लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे।
विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर उसकी चिंताएं हैं। विपक्ष का तर्क है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार लगातार आश्वासन दे रही है कि दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आएगी।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है।
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