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वन और वृक्ष आवरण संरक्षण उपायों को मजबूत करने के लिए कार्यशाला आयोजित: भूपेंद्र यादव

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन और वृक्ष आवरण संरक्षण मजबूत करने वाली कार्यशाला की जानकारी दी, जिसमें इसरो, आईआईएफएम और आईसीएफआरई के विशेषज्ञ शामिल हुए।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वन और वृक्ष आवरण के संरक्षण से जुड़े उपायों को और मजबूत करने के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न प्रमुख संस्थानों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

भूपेंद्र यादव के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य देश में वन क्षेत्रों और वृक्ष आवरण की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाना तथा संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना था। इसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।

मंत्री ने कहा कि वन और वृक्ष आवरण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

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कार्यशाला के दौरान वन संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों को बेहतर बनाने, वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल बढ़ाने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रभावी रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई। इसमें वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की विशेषज्ञता का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया।

इसरो जैसे संस्थानों की तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल वन एवं वृक्ष आवरण की निगरानी और आकलन में किया जा सकता है। वहीं, वन प्रबंधन और अनुसंधान से जुड़े संस्थान संरक्षण की नीतियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कार्यशाला के माध्यम से विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों के बीच विचारों तथा अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।

उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात में वन और वृक्ष आवरण की सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों, विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।

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