विश्व धरोहर दिवस: ताजमहल से आगे भारत के छिपे हुए ऐतिहासिक स्थल
विश्व धरोहर दिवस पर ताजमहल से आगे चेट्टीनाड, धोलावीरा, माजुली, ओरछा और जीरो घाटी जैसे कम प्रसिद्ध लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को जानने का अवसर मिलता है।
विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर अक्सर चर्चा ताजमहल, हम्पी और जयपुर के किलों जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक ही सीमित रह जाती है। लेकिन भारत का इतिहास और संस्कृति केवल इन जगहों तक सीमित नहीं है। देश में कई ऐसे कम प्रसिद्ध लेकिन अत्यंत समृद्ध धरोहर स्थल मौजूद हैं, जो इतिहास, वास्तुकला और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।
तमिलनाडु का चेट्टीनाड एक ऐसा स्थान है, जहां समय जैसे थम सा जाता है। यहां बनी भव्य हवेलियां चेट्टियार समुदाय की वास्तुकला का शानदार उदाहरण हैं। यूरोपीय और तमिल शैली के मिश्रण से बनी ये इमारतें बेहद आकर्षक हैं। साथ ही यहां का पारंपरिक भोजन और शांत वातावरण इसे और खास बनाता है।
गुजरात का धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। कच्छ के रेगिस्तानी इलाके में स्थित यह नगर प्राचीन जल प्रबंधन और शहरी नियोजन का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। यहां के खंडहर आज भी उस सभ्यता की उन्नत सोच को दर्शाते हैं।
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असम का माजुली दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित है और सदियों पुराने सत्रों (मठों) के लिए प्रसिद्ध है, जो असम की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। यहां की जीवनशैली प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।
मध्य प्रदेश का ओरछा एक ऐसा शहर है, जहां महल, मंदिर और घाट आज भी अतीत की कहानी कहते हैं। यहां का शांत वातावरण इतिहास से जुड़ाव का अनोखा अनुभव देता है।
अरुणाचल प्रदेश की जीरो घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपातानी जनजाति की अनूठी संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है। हरे-भरे खेत और पहाड़ इस घाटी को और आकर्षक बनाते हैं।
विश्व धरोहर दिवस हमें याद दिलाता है कि असली अनुभव अक्सर भीड़-भाड़ वाले स्थानों से दूर छिपे होते हैं, जहां इतिहास शांत रूप में जीवित रहता है।