यमन में सैन्य काफिले पर कायराना हमला, पांच की मौत
यमन में सरकार समर्थक सैन्य काफिले पर बम हमले में पांच लोगों की मौत हो गई। हमला जायंट्स ब्रिगेड्स के कमांडर को निशाना बनाकर किया गया, जबकि सरकार ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।
यमन में सऊदी अरब समर्थित सरकार से जुड़े एक सैन्य काफिले पर हुए बम हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। यमनी अधिकारियों ने बुधवार (21 जनवरी) को बताया कि यह हमला सरकार समर्थक जायंट्स ब्रिगेड्स के एक वरिष्ठ कमांडर को निशाना बनाकर किया गया था।
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल) के अनुसार, यह काफिला जायंट्स ब्रिगेड्स के कमांडर हमदी शुक्री को लेकर जा रहा था, तभी विस्फोट हुआ। परिषद ने सरकारी मीडिया के माध्यम से जारी बयान में इस हमले को देश में सुरक्षा स्थिति को स्थिर करने के प्रयासों को कमजोर करने की “हताश कोशिश” करार दिया। बयान में कहा गया कि सऊदी अरब के सहयोग से सुरक्षा के मोर्चे पर “ठोस प्रगति” हो रही थी, जिसे बाधित करने के लिए यह हमला किया गया।
परिषद ने इसे “विश्वासघाती आतंकी हमला” बताते हुए कहा कि इसके बाद व्यावहारिक और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। इनमें हमलावरों का पीछा करना और उनसे जुड़े सहायता नेटवर्क को ध्वस्त करना शामिल है। हालांकि सरकार ने फिलहाल इस हमले के लिए किसी विशेष संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
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सरकारी बयान में सभी राष्ट्रीय शक्तियों और राजनीतिक दलों से अपील की गई कि वे अराजकता, तोड़फोड़ और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों। परिषद ने कहा कि यह अपराध पूरे देश को प्रभावित करता है और राजनीतिक मतभेदों के कारण चुप्पी या हिचकिचाहट उचित नहीं ठहराई जा सकती, खासकर जब राज्य को ही निशाना बनाया जा रहा हो।
एक सुरक्षा सूत्र ने बताया कि उत्तरी अदन के जावला इलाके में सड़क किनारे रखी गई कार में बम विस्फोट हुआ, जब शुक्री का काफिला वहां से गुजर रहा था। हमदी शुक्री इस हमले में बच गए, हालांकि उनके पैर में छर्रे लगने की पुष्टि हुई है।
यमन स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे यमनी सरकार से जुड़े सैन्य काफिले पर “बिना उकसावे का हमला” बताया।
गौरतलब है कि यमन 2014 से गृहयुद्ध में फंसा हुआ है, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से तत्कालीन सरकार को बेदखल कर दिया था। इसके बाद से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समर्थित गुटों के बीच संघर्ष ने देश को गंभीर मानवीय संकट में धकेल दिया है।
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