युद्ध अभ्यास 2026 से भारत-अमेरिका की रक्षा साझेदारी होगी मजबूत: सर्जियो गोर
युद्ध अभ्यास 2026 में भारत और अमेरिका के 600 से 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। सर्जियो गोर ने इसे रक्षा सहयोग और आपसी भरोसा मजबूत करने वाला बताया।
राजस्थान में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ जारी है। इस दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और आपसी भरोसे को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
सर्जियो गोर ने कहा कि ‘युद्ध अभ्यास’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी की मजबूती और दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे विश्वास का शक्तिशाली उदाहरण हैं। उन्होंने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की तथा उनके प्रशिक्षण, कौशल और सैन्य उपकरणों को कार्रवाई में देखा। उन्होंने भारतीय सेना को मेजबानी के लिए धन्यवाद भी दिया।
600 से 700 सैनिक ले रहे हिस्सा
‘युद्ध अभ्यास 2026’ का आयोजन 15 से 26 सितंबर तक उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया जा रहा है। इसमें भारत और अमेरिका के करीब 600 से 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग, परिचालन समन्वय और आपसी संचालन क्षमता को बढ़ाना है, ताकि जटिल युद्ध परिस्थितियों में दोनों सेनाएं मिलकर प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
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अभ्यास के दौरान भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता भी प्रदर्शित की गई। पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम और स्वदेशी धनुष तोप ने लगातार फायरिंग के जरिए अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। अमेरिकी मूल की एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोप ने भी फायरिंग अभ्यास में हिस्सा लिया। इसके अलावा अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की क्षमता भी प्रदर्शित की गई।
काउंटर-ड्रोन युद्ध पर विशेष जोर
इस साल के अभ्यास में काउंटर-ड्रोन युद्ध को विशेष महत्व दिया गया है। पहली बार भारत में अमेरिकी निर्मित एमएलआईडीएस प्रणाली को अभ्यास में शामिल किया गया है। इसके जरिए दोनों सेनाएं ड्रोन खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
‘युद्ध अभ्यास’ में कमांड पोस्ट एक्सरसाइज, फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज और संयुक्त लाइव-फायर प्रदर्शन शामिल हैं। इसमें हथियार प्रशिक्षण के साथ कमांड, संचार, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और परिचालन प्रक्रियाओं में तालमेल बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।