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नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पर्यावरण और जलवायु प्राथमिकताओं पर किया मंथन

नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर चर्चा कर साझा रणनीति बनाने तथा सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया।

नई दिल्ली में सोमवार को ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित वरिष्ठ अधिकारियों की यह बैठक भारत मंडपम में हुई। इसकी अध्यक्षता पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने की।

बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अपने मुख्य संबोधन में तन्मय कुमार ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स एक आर्थिक संवाद के मंच से आगे बढ़कर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा और समाधान तलाशने वाला प्रभावशाली मंच बन गया है।

उन्होंने बढ़ते प्रदूषण, जैव विविधता के नुकसान और वैश्विक तापमान में वृद्धि जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई। इसके साथ ही सतत विकास, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन, संसाधन दक्षता, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा प्रभावी पर्यावरणीय शासन को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।

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तन्मय कुमार के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मानव-केंद्रित वैश्विक सहयोग और ‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण से प्रेरित है। इसी सोच को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” में शामिल किया गया है। भारत ने विकास लक्ष्यों के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को जोड़कर आगे बढ़ने पर जोर दिया है।

पर्यावरणीय सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्र

भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास संपर्क समूह ने चार आपस में जुड़े प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना, वनीकरण एवं जंगल की आग का प्रबंधन और आपदा लचीलापन, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा जलवायु अनुकूलन शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि ये प्राथमिकताएं ब्रिक्स देशों के सामने मौजूद साझा पर्यावरणीय चुनौतियों को दर्शाती हैं। जलवायु लचीलापन, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, संसाधनों का कुशल उपयोग और सतत विकास एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग प्रयासों के बजाय एकीकृत रणनीति आवश्यक है।

भारत की अध्यक्षता में व्यापक विचार-विमर्श

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता शुरू होने के बाद सदस्य देशों के बीच पर्यावरण और जलवायु संबंधी मुद्दों पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श हुआ है। इस अवधि में 21 आभासी विषयगत और वार्ता बैठकों, 10 द्विपक्षीय परामर्श, दो विषयगत संवाद और दो तकनीकी वेबिनार आयोजित किए गए।

इन बैठकों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण और जलवायु से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर साझा समझ विकसित करना और सहमति बनाना था। वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक से इन चर्चाओं के परिणामों को एकजुट करने तथा प्राथमिक क्षेत्रों पर आगे सहमति बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तन्मय कुमार ने विश्वास जताया कि अब तक की चर्चाओं में दिखाई दिया सहयोग, आपसी सम्मान और विश्वास आगे भी विचार-विमर्श को दिशा देता रहेगा।

18 अगस्त को होगी ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक

वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद अब 18 अगस्त को नई दिल्ली में 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्री हिस्सा लेंगे।

प्रतिनिधिमंडलों ने ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत के नेतृत्व की सराहना की और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं पर सदस्य देशों को एक साझा मंच पर लाने के प्रयासों की प्रशंसा की। प्रतिनिधियों ने भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाई गई आपसी सम्मान, विश्वास और सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण बताया।

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