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चीन के लिए BRICS उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का सबसे बड़ा मंच, भारत के सामने बढ़ी चुनौती

चीन BRICS के वैश्विक प्रभाव बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और अपनी पहलों को आगे बढ़ाने के मंच के रूप में देखता है। भारत के सामने संतुलन की चुनौती है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे। सात साल बाद उनका भारत दौरा ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चीन का करीब 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी इस सम्मेलन में पहुंचा।

चीन के लिए BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था और नियमों को प्रभावित करने की अपनी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनवरी 2027 से चीन BRICS की अध्यक्षता संभालेगा और उसकी तैयारियों से संकेत मिलता है कि वह संगठन को अपनी कई पहलों को आगे बढ़ाने के मंच के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।

चीन BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मजबूत करने के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। बीजिंग अपनी ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव (GDI) को भी विकास के वैकल्पिक मॉडल के तौर पर पेश करता रहा है।

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BRICS के संस्थागत विकास में भी चीन की बड़ी भूमिका रही है। 2017 में शी जिनपिंग ने ‘BRICS प्लस’ मॉडल का प्रस्ताव रखा था। 2014 में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के गठन को आगे बढ़ाने में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका रही और इसका मुख्यालय शंघाई में है। चीन ने 100 अरब डॉलर के BRICS कंटिंजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट में 41 अरब डॉलर का योगदान दिया है।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। रूस और ईरान जैसे देशों पर डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था तथा प्रतिबंधों का प्रभाव रहा है। चीन भी ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए वित्तीय विकल्प मजबूत करना चाहता है।

भारत के लिए चुनौती यह है कि BRICS में चीन की आर्थिक ताकत बाकी सदस्यों की संयुक्त GDP से भी अधिक है। वह सभी सदस्य देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में भारत को चीन के प्रभाव का संतुलन बनाने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता मजबूत करनी होगी।

भारत डॉलर को बदलने की नीति का समर्थन नहीं करता, लेकिन वित्तीय जोखिम कम करने के विकल्पों का विरोध भी नहीं करता। चीन की 2027 की अध्यक्षता में भारत के सामने BRICS के एजेंडे पर संतुलन बनाए रखने और अपने हितों को मजबूती से रखने की बड़ी चुनौती होगी।

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