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भारत और नीदरलैंड्स के बीच हरित हाइड्रोजन सहयोग मजबूत, नई फेलोशिप और आईआईटी साझेदारी की शुरुआत

भारत और नीदरलैंड्स ने हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नई फेलोशिप और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन–19 आईआईटी के बीच शैक्षणिक साझेदारी शुरू की।

भारत और नीदरलैंड्स ने स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करते हुए हरित हाइड्रोजन पर केंद्रित दो महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है। शुक्रवार को इंडिया–नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप प्रोग्राम लॉन्च किया गया, साथ ही यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन और भारत के 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बीच एक अहम शैक्षणिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के माध्यम से सुगम बनाया गया है।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य हरित हाइड्रोजन तकनीकों में अनुसंधान क्षमता को बढ़ाना, प्रतिभा विकास को प्रोत्साहित करना और प्रयोगशाला आधारित शोध को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने वाली नवाचार प्रक्रिया को गति देना है। हरित हाइड्रोजन भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का एक प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है।

हाइड्रोजन फेलोशिप प्रोग्राम के दिशा-निर्देश और प्रस्ताव आमंत्रण हाल ही में जारी किए गए हैं। यह राष्ट्रीय स्तर की क्षमता निर्माण पहल भारतीय संस्थानों से जुड़े योग्य पीएचडी शोधार्थियों, पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए खुली है। इसके तहत चयनित प्रतिभागियों को नीदरलैंड्स के उन्नत हाइड्रोजन इकोसिस्टम में प्रशिक्षण और शोध का अवसर मिलेगा, जिसमें सिस्टम इंटीग्रेशन, सुरक्षा, तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण, जीवन-चक्र मूल्यांकन और स्वदेशीकरण के मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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कार्यक्रम के शुभारंभ पर डीएसटी सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लक्षित क्षमता निर्माण प्रयास हाइड्रोजन तकनीकों को अनुसंधान से वास्तविक क्रियान्वयन तक ले जाने के लिए आवश्यक हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां उत्सर्जन कम करना चुनौतीपूर्ण है।

नीदरलैंड्स के उप राजदूत हुयब माइनारेन्ड्स ने दोनों देशों की ऊर्जा संक्रमण प्राथमिकताओं में मजबूत सामंजस्य को रेखांकित किया। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के अध्यक्ष प्रो. डॉ. यौके डी व्रीस ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने में दीर्घकालिक शैक्षणिक साझेदारियों के महत्व पर जोर दिया।

इसी अवसर पर यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन और 19 आईआईटी के बीच संस्थागत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे संकाय और छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और ज्ञान साझा करने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, 2047 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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