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100 साल बाद भी प्रासंगिक रहेंगे महात्मा गांधी के विचार: अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार भारतीय जीवनशैली, मूल्यों और ज्ञान परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने छात्रों से गांधी के सिद्धांत जीवनभर अपनाने का आग्रह किया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज के समाज के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं और आने वाले 100 वर्षों बाद भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने गुजरात विद्यापीठ के विद्यार्थियों से गांधीजी के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।

अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि गांधीजी का संदेश भारतीय जीवनशैली, भारतीय मूल्यों और देश की ज्ञान परंपरा में गहराई से निहित था। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने कोई नई बात नहीं कही, बल्कि सदियों से चली आ रही भारतीय परंपराओं और विचारों को समाज के सामने रखा।

शाह ने याद दिलाया कि गुजरात विद्यापीठ की स्थापना महात्मा गांधी ने 18 अक्टूबर 1920 को की थी। इसका उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना था, जो भारतीय परिस्थितियों, संस्कृति और जरूरतों के अनुरूप हो।

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उन्होंने कहा कि गांधीजी का मानना था कि भारत की स्वतंत्रता तभी पूरी होगी, जब देश की भाषा, संस्कृति, श्रम और उद्देश्य भी भारतीय जड़ों से जुड़े हों। गुजरात विद्यापीठ को उन्होंने भारतीय शिक्षा की अवधारणा के प्रयोग की प्रयोगशाला बताया, जहां खेत, हस्तशिल्प केंद्र, ग्रामसभा और समाज को भी कक्षा का दर्जा दिया गया।

अमित शाह ने शिक्षा में हाथ, हृदय और मस्तिष्क के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाथों में कौशल, हृदय में संवेदनशीलता और मस्तिष्क में ज्ञान के साथ विवेक होना आवश्यक है। केवल ज्ञान अहंकार पैदा कर सकता है, जबकि ज्ञान और विवेक विनम्रता तथा विद्वता को जन्म देते हैं।

उन्होंने छात्रों को गांधीजी के सामाजिक जीवन से जुड़े सिद्धांतों को याद रखने की सलाह दी। इनमें सिद्धांतहीन राजनीति, नैतिकता रहित व्यापार, श्रम के बिना धन, विवेक के बिना ज्ञान, संयम के बिना भोग, चरित्र के बिना ज्ञान और मानवता के बिना विज्ञान को गंभीर सामाजिक बुराइयां बताया गया है।

शाह ने गांधीजी के 11 व्रतों का भी उल्लेख किया, जिनमें सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शारीरिक श्रम, इंद्रिय संयम, निर्भयता, सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, स्वदेशी और अस्पृश्यता उन्मूलन शामिल हैं।

उन्होंने खादी, ग्रामोद्योग, स्वच्छता और मातृभाषा के महत्व पर भी जोर दिया। शाह के अनुसार, खादी एवं ग्रामोद्योग का कारोबार 2013-14 के करीब 31 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.87 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

उन्होंने कहा कि दूसरी भाषाएं सीखना अच्छी बात है, लेकिन अपनी मातृभाषा बोलने में किसी को हीन भावना नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भाषा व्यक्ति को उसकी संस्कृति, इतिहास और जड़ों से जोड़ती है। शाह ने विद्यार्थियों से ग्राम स्वराज, गांवों की समृद्धि और सहकारिता के गांधीवादी सिद्धांतों को सार्वजनिक एवं सामाजिक जीवन में याद रखने की अपील की।

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