ऑपरेशन सिंदूर के 15 महीने बाद पाकिस्तान ने फिर बनाया जैश का बहावलपुर ठिकाना, 11 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च
ऑपरेशन सिंदूर में तबाह जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर परिसर पाकिस्तान में फिर तैयार हो गया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पुनर्निर्माण पर करीब 11 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के करीब 15 महीने बाद पाकिस्तान ने बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात मार्कज सुभानअल्लाह परिसर का पुनर्निर्माण कर दिया है। The Indian Witness द्वारा प्राप्त वीडियो और तस्वीरों में परिसर के दोबारा तैयार होने के संकेत मिले हैं। यह परिसर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में स्थित है और मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों की कार्रवाई के दौरान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था।
रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद परिसर में बड़े और गहरे गड्ढे बन गए थे। अब वहां पुनर्निर्माण का काम पूरा हो चुका है। परिसर के गुंबदों और मुख्य केंद्रीय हॉल की मरम्मत की गई है। दीवारों पर नया प्लास्टर, रंग-रोगन और आयातित संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। बताया जा रहा है कि यह परिसर अब दोबारा पूरी तरह सक्रिय हो चुका है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद को करीब 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये दिए गए थे। इनमें से लगभग 11 करोड़ पाकिस्तानी रुपये अकेले बहावलपुर के मार्कज सुभानअल्लाह परिसर के पुनर्निर्माण पर खर्च किए गए।
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सूत्रों ने यह भी बताया कि परिसर से सटी क्षतिग्रस्त इमारतों को पूरी तरह हटा दिया गया। इनमें मदरसा अल-सबीर और आतंकवादी कमांडरों के आवासीय परिसर शामिल थे। इनके स्थान पर दोबारा निर्माण किया गया।
इस बीच, जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के संगठन में प्रभाव को लेकर भी जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक बीमारी के कारण उसे संगठन के संचालन से अलग रखा गया है। उसके भाइयों तल्हा अल-सैफ और मोहिउद्दीन औरंगजेब उर्फ अम्मार अल्वी को मुख्यालय की परिचालन जिम्मेदारी दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार मसूद अजहर और उसका भाई रऊफ असगर सिंध प्रांत के नवाबशाह जिले में हैं, जहां उन्हें कथित तौर पर पाकिस्तानी सरकार की सुरक्षा मिली हुई है।
ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। भारत ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर ऐसी कार्रवाई दोबारा की जा सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी कहा है कि भारत की सहनशीलता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
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