प्रधानमंत्री मोदी का हस्तलिखित वंदे मातरम् पोस्टकार्ड विक्रम-1 मिशन आगमन के साथ जाएगा अंतरिक्ष
स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 परीक्षण मिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्’ पोस्टकार्ड अंतरिक्ष जाएगा। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की नई उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आने वाली है। स्काईरूट एयरोस्पेस के आगामी विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 मिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्’ पोस्टकार्ड अंतरिक्ष की यात्रा करेगा। यह मिशन श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखे गए इस विशेष पोस्टकार्ड पर ‘वंदे मातरम्’ के साथ तारीख और प्रधानमंत्री का नाम भी अंकित है। इस पोस्टकार्ड के अलावा स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम, निवेशकों, नीति निर्माताओं और समर्थकों के हस्तलिखित संदेश भी इस मिशन के पेलोड का हिस्सा होंगे।
स्काईरूट एयरोस्पेस ने एक वीडियो साझा कर इस जानकारी को सार्वजनिक किया। कंपनी की टीम ने प्रधानमंत्री के संदेश वाले इस पोस्टकार्ड को अब तक लॉन्च किए गए सबसे महत्वपूर्ण पेलोड में से एक बताया है।
और पढ़ें: भारतीय नौसेना को मिला एक और एमएच-60आर सीहॉक हेलिकॉप्टर, समुद्री सुरक्षा क्षमता होगी मजबूत
कंपनी के अनुसार, यह केवल एक साधारण पोस्टकार्ड नहीं है, बल्कि यह भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि भारत निजी क्षेत्र के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है।
मिशन आगमन के बारे में
विक्रम-1 रॉकेट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसे छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में पहुंचाने के लिए विकसित किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्रम-1 लगभग 350 किलोग्राम तक के उपग्रहों को 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होगा।
भारत में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। स्काईरूट के अलावा इसरो का छोटा उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) और अग्निकुल जैसी कंपनियां भी नए रॉकेट विकसित कर रही हैं।
स्टारलिंक और वनवेब जैसे वैश्विक उपग्रह समूहों के विस्तार के बीच छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप अंतरिक्ष उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
मिशन आगमन केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों, उद्यमियों, निवेशकों, नीति निर्माताओं और आम नागरिकों को जोड़ने वाली भारत की नई अंतरिक्ष यात्रा का प्रतीक भी है।
और पढ़ें: स्पेसएक्स ने स्टारशिप परीक्षण उड़ान अचानक रोकी, इंजन में खराबी के कारण हुआ लॉन्च एबॉर्ट