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सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार पर दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली तथा अमेरिकी ब्याज दरों की आशंका से भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) तथा ऑटो शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। इसके अलावा इस महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका से भी निवेशकों का रुझान सतर्क रहा।

शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50, 36.05 अंक यानी 0.15 प्रतिशत गिरकर 23,743.10 अंक पर खुला। वहीं, सेंसेक्स 150 अंक से अधिक टूटकर 75,970.28 अंक पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती कमजोरी व्यापक स्तर पर दिखाई दी।

क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी ऑटो सबसे अधिक दबाव में रहे और शुरुआती कारोबार में करीब एक प्रतिशत तक गिर गए। निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.39 प्रतिशत कमजोर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल में 0.45 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।

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बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह धीमी लेकिन स्थिर गिरावट के दौर में है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, आईटी शेयरों में बिकवाली, अमेरिकी फेड की संभावित दर वृद्धि और तेजी से बढ़ते आईपीओ बाजार में तरलता के खिंचाव को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत बुनियादी स्थितियों के बावजूद लार्जकैप शेयरों में कमजोरी निवेशकों के लिए अवसर पैदा कर सकती है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में औसत स्तर की ओर वापसी होने पर मजबूत कंपनियों के लार्जकैप शेयरों में तेजी की संभावना बन सकती है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,860 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध है, जबकि 23,720 तत्काल समर्थन स्तर माना जा रहा है। इसके नीचे टूटने पर 23,570 और 23,260 के स्तर अगले समर्थन बन सकते हैं।

एशियाई बाजारों में भी मंगलवार सुबह मिश्रित रुख रहा। क्षेत्रीय आर्थिक आंकड़ों में असमानता और फारस की खाड़ी में ईरान से जुड़े तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ईरान द्वारा अपनी संपत्तियों पर किसी नए अमेरिकी हमले के जवाब में कार्रवाई की चेतावनी के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी है और तेल कीमतों में तेजी जारी है।

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