माइक्रोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों के अध्ययन के लिए तमिलनाडु सरकार ने IIT-मद्रास से मदद मांगी
तमिलनाडु सरकार ने प्लास्टिक पाउच में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से माइक्रोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों के अध्ययन के लिए IIT-मद्रास से सहयोग मांगा है।
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया है कि उसने माइक्रोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान–मद्रास (IIT-M) से सहयोग मांगा है। यह अध्ययन विशेष रूप से दूध, कॉफी, चाय और गर्म सांभर जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन से जुड़े जोखिमों पर केंद्रित होगा, जो अक्सर प्लास्टिक पाउच या कंटेनरों में बेचे जाते हैं।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक अध्ययन पर गहरी चिंता व्यक्त की थी, जिसमें यह सामने आया था कि माइक्रोप्लास्टिक कण गर्भवती महिलाओं की प्लेसेंटा तक को प्रभावित कर रहे हैं। न्यायालय ने इस निष्कर्ष को चौंकाने वाला बताते हुए राज्य सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने को कहा था।
मामले की सुनवाई कर रही विशेष खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और डी. भारथा चक्रवर्ती शामिल हैं, को अवगत कराया गया कि स्वास्थ्य सचिव पी. सेंथिलकुमार ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को अतिरिक्त महाधिवक्ता जे. रविंद्रन को पत्र लिखकर इस विषय पर IIT-मद्रास से अध्ययन कराने के अनुरोध की जानकारी दी है।
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सरकार ने अदालत को बताया कि प्लास्टिक पाउच में गर्म खाद्य और पेय पदार्थों के उपयोग से माइक्रोप्लास्टिक के भोजन में घुलने की आशंका बढ़ जाती है, जो लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है।
IIT-मद्रास से अपेक्षा की जा रही है कि वह वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत, उसके शरीर में प्रवेश के तरीकों और संभावित दुष्प्रभावों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। इस अध्ययन के आधार पर राज्य सरकार भविष्य में प्लास्टिक उपयोग को नियंत्रित करने और वैकल्पिक पैकेजिंग को बढ़ावा देने जैसे नीतिगत निर्णय ले सकती है।
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