×
 

असली दोस्त असहमति रख सकते हैं: भारत के साथ गहरे व्यापारिक रिश्तों पर अमेरिकी दूत का जोर

अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, मतभेदों के बावजूद दोनों देश साझेदारी गहरी करेंगे और भारत को ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शामिल होने का न्योता मिलेगा।

अमेरिका और भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। यह बात सोमवार को नई दिल्ली के लिए नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सच्चे मित्र अंततः उन्हें सुलझा लेते हैं।

सर्जियो गोर, जो दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत भी हैं, ने अपने पदभार संभालने के पहले दिन अमेरिकी दूतावास में दिए गए संबोधन में कहा, “असली दोस्त असहमति रख सकते हैं, लेकिन अंत में हमेशा समाधान निकाल लेते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, इसलिए किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन अमेरिका इस दिशा में दृढ़ संकल्पित है।

गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद भारत, चीन के बाद रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। इससे ट्रंप प्रशासन नाराज रहा है और उसने आरोप लगाया कि भारत की खरीद से मास्को के युद्ध अभियान को बल मिल रहा है। इसी के चलते अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया, जिससे कुल अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।

और पढ़ें: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यात्रा के साथ पीएम मोदी की कार डिप्लोमेसी जारी

सर्जियो गोर ने बताया कि व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भारत-अमेरिका के बीच अगली वार्ता मंगलवार को निर्धारित है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले महीने भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संसाधन, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता शामिल हैं। जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और इज़राइल पहले ही इस पहल से जुड़ चुके हैं।

भारत और अमेरिका पिछले वर्ष की शुरुआत से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि 2025 तक इसके पहले चरण को पूरा करने की उम्मीद थी, लेकिन रूसी तेल की खरीद और घरेलू उद्योगों व किसानों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर मतभेद के कारण यह अभी तक संभव नहीं हो सका है। गोर ने कहा कि व्यापार के अलावा दोनों देश सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे।

और पढ़ें: PSLV में तकनीकी गड़बड़ी से अंतरिक्ष में खोए 16 उपग्रह, ISRO के लिए बड़ा झटका

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share