×
 

गाज़ा को लेकर इज़राइल की असली मंशा क्या है? टालमटोल, विभाजन और बाधाओं की रणनीति

गाज़ा को लेकर इज़राइल की नीति सुरक्षा, बसावट और राजनीतिक मजबूरियों में उलझी है। पुनर्निर्माण के बजाय टालमटोल और यथास्थिति बनाए रखने की रणनीति ज्यादा स्पष्ट दिखती है।

पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इज़राइल गाज़ा पट्टी पर भीषण सैन्य हमले कर रहा है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नरसंहार जैसा करार दिया है। इन हमलों में गाज़ा की अधिकांश रिहायशी इमारतें और बुनियादी ढांचा तबाह हो चुका है, जबकि 70,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं। जो लोग जीवित बचे हैं, वे कड़ाके की ठंड में भोजन, दवाइयों और आश्रय की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

ऐसे समय में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू — जिनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गाज़ा में युद्ध अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल हो गए हैं, जिसका उद्देश्य गाज़ा के पुनर्निर्माण और शासन की निगरानी करना बताया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या इज़राइल वास्तव में गाज़ा का पुनर्निर्माण चाहता है या मौजूदा हालात को ही बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू के सामने राजनीतिक रूप से कठिन राह है। इस साल इज़राइल में चुनाव होने हैं और उन्हें अमेरिकी योजनाओं के साथ सहयोगी दिखना भी है, साथ ही अपनी गठबंधन सरकार को भी संभालना है। उनकी सरकार में वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच जैसे नेता हैं, जो न केवल गाज़ा के पुनर्निर्माण के खिलाफ हैं, बल्कि संघर्षविराम का भी विरोध करते हैं और गाज़ा को धार्मिक आधार पर बसाने की बात करते हैं।

और पढ़ें: मानवता का सबसे बड़ा अपराधी: पाक रक्षा मंत्री का बयान, अमेरिका से नेतन्याहू को अगवा करने की मांग

हालांकि नेतन्याहू कई मोर्चों पर असफल होते दिख रहे हैं। वे संघर्षविराम के दूसरे चरण को टाल नहीं पाए, रफ़ाह सीमा चौकी को खोलने का विरोध भी नाकाम रहा और तुर्की व क़तर की बोर्ड ऑफ पीस में भागीदारी पर आपत्तियां भी अमेरिका ने नजरअंदाज कर दीं।

देश के भीतर इज़राइली कैबिनेट गाज़ा को लेकर बंटी हुई है। एक धड़ा सुरक्षा के नाम पर सीमा के पास बफर ज़ोन बनाने और फ़िलिस्तीनियों को दूर धकेलने की नीति पर जोर दे रहा है। वहीं आम इज़राइली जनता, दो साल से अधिक युद्ध से थकी हुई, गाज़ा में हो रहे मानवीय संकट को काफी हद तक नजरअंदाज करती दिखती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इज़राइल के पास गाज़ा को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। राजनीति, सुरक्षा और विचारधारा के बीच उलझा नेतृत्व हालात को और अराजक बना रहा है, जबकि फ़िलिस्तीनी आम लोगों की पीड़ा इज़राइली समाज और मीडिया में लगभग अदृश्य बनी हुई है।

और पढ़ें: अमेरिका के बाद इज़राइल ने कई संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से संबंध तोड़े

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share