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आदित्य ठाकरे की करीबी सहयोगी का शिवसेना (यूबीटी) से इस्तीफा, भाजपा में शामिल होने की तैयारी

बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) को झटका, आदित्य ठाकरे की करीबी सहयोगी शीतल देवरुखकर-शेठ ने पार्टी छोड़ी और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों से पहले बड़ा झटका लगा है। पार्टी की उपनेता और आदित्य ठाकरे की करीबी सहयोगी रहीं शीतल देवरुखकर-शेठ ने गुरुवार (1 जनवरी 2026) को संगठन से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि वह जल्द ही महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगी।

पीटीआई के पास उपलब्ध उनके इस्तीफे के पत्र के अनुसार, शीतल देवरुखकर-शेठ ने पार्टी छोड़ने का फैसला निजी और राजनीतिक कारणों के चलते लिया। बीएमसी के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना अगले दिन की जाएगी। ऐसे में यह घटनाक्रम शिवसेना (यूबीटी) के लिए चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

शीतल देवरुखकर-शेठ युवा सेना, जो शिवसेना (यूबीटी) की युवा इकाई है, की वरिष्ठ नेता रही हैं। वह युवा सेना की कोर कमेटी की सदस्य थीं और पार्टी के कई अभियानों व पहलों में आदित्य ठाकरे के साथ नजदीकी रूप से काम करती रही हैं। उन्हें आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था।

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इसके अलावा, शीतल देवरुखकर-शेठ मुंबई विश्वविद्यालय की सीनेट की सदस्य भी हैं, जो विश्वविद्यालय की सर्वोच्च शासी निकाय मानी जाती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें बीएमसी चुनावों के लिए खुद को तैयार रहने को कहा गया था, क्योंकि पार्टी उन्हें चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रही थी। हालांकि, बाद में उनका नाम शिवसेना (यूबीटी) की किसी भी आधिकारिक उम्मीदवार सूची में शामिल नहीं किया गया।

सूत्रों का कहना है कि टिकट न मिलने और संगठन के भीतर बढ़ती अनिश्चितता के चलते वह असंतुष्ट थीं। उनके भाजपा में शामिल होने से मुंबई की राजनीति में समीकरण बदल सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब बीएमसी चुनाव बेहद नजदीक हैं। विपक्षी दल इसे शिवसेना (यूबीटी) के भीतर अंदरूनी असंतोष के रूप में देख रहे हैं, जबकि भाजपा इसे अपनी रणनीतिक बढ़त मान रही है।

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