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AI समिट विवाद: भाजपा का नेहरू और कांग्रेस पर तीखा हमला

एआई समिट विवाद पर भाजपा ने जवाहरलाल नेहरू को ‘समझौता किया हुआ’ बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। सीआईए-केजीबी संबंध और चीन-पाकिस्तान मुद्दों पर सात सवाल उठाए।

एआई समिट विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा सांसद संबित पात्रा ने नेहरू को ‘समझौता किया हुआ’ बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।

पात्रा ने दावा किया कि नेहरू के कार्यकाल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और सोवियत संघ की केजीबी के एजेंट उनके कार्यालय में सक्रिय थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के विशेष सहायक एम.ओ. मथाई को अमेरिकी एजेंट कहा जाता था और 1960 के दशक में केजीबी की भी मजबूत मौजूदगी थी।

भाजपा नेता ने कहा कि उस दौर में विदेशी शक्तियों को आवश्यक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो जाते थे। उन्होंने कांग्रेस से सात सवाल पूछते हुए पूछा कि क्या नेहरू ने देश की सुरक्षा से समझौता किया था।

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पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पंचशील समझौते के तहत तिब्बत को चीन के हवाले किया गया। उन्होंने कहा कि खुफिया ब्यूरो ने अक्साई चिन में चीन द्वारा सड़क निर्माण की जानकारी दी थी, लेकिन नेहरू ने इसे नजरअंदाज किया। 1962 के भारत-चीन युद्ध में हार के लिए भी उन्होंने नेहरू की नीतियों और जनरल बी.एम. कौल की नियुक्ति को जिम्मेदार ठहराया।

इसके अलावा, पात्रा ने आरोप लगाया कि नेहरू ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद नौवें संविधान संशोधन के जरिए बेरुबाड़ी क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चीन और पाकिस्तान को जमीन देने के पीछे कोई दबाव या प्रलोभन था।

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