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दिल्ली में गरीबों को फ्लैट न देने पर जांच पर विचार, केंद्र का बड़ा बयान

केंद्र सरकार दिल्ली में JNNURM के तहत बने 48 हजार फ्लैट गरीबों को न मिलने पर जांच पर विचार करेगी। खराब फ्लैटों की मरम्मत और पुनर्निर्माण कर उन्हें जरूरतमंदों को देने की योजना है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (JNNURM) के तहत बनाए गए हजारों फ्लैट गरीबों को आवंटित न किए जाने के मामले में जांच कराने पर विचार करने की बात कही है। सोमवार (9 फरवरी 2026) को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने यह बयान दिया।

मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वर्ष 2012 में केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से गरीबों के लिए कुल 52,344 फ्लैट बनाए गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 4,871 फ्लैट ही जरूरतमंदों को आवंटित किए गए। शेष लगभग 48,000 फ्लैट खाली पड़े रहे और समय के साथ उनकी स्थिति खराब हो गई है। कुछ फ्लैट अब रहने लायक भी नहीं बचे हैं।

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के कारण इन फ्लैटों का आवंटन नहीं किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए और इन फ्लैटों की मरम्मत कर उन्हें गरीबों को दिया जाए।

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इस पर मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी ताकि दोषियों को सजा मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने इन फ्लैटों की मरम्मत करने की पहल की है, ताकि इन्हें झुग्गियों में रहने वाले लोगों को आवंटित किया जा सके।

मंत्री ने कहा कि जो फ्लैट रहने योग्य नहीं हैं, उनकी जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि गरीबों को जल्द से जल्द सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराया जाए।

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