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बीजेपी को जवाब देने के लिए बंगाली हिंदुत्व पर क्यों दांव लगा रही हैं ममता बनर्जी

ममता बनर्जी बीजेपी के हिंदुत्व को चुनौती देने के लिए बंगाली हिंदू सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय अस्मिता को राजनीतिक हथियार बना रही हैं, ताकि 2026 में अपनी पकड़ मजबूत रख सकें।

हर रैली और सार्वजनिक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह कहती रही हैं कि वह किसी खास धर्म का तुष्टिकरण नहीं करतीं और उनकी राजनीति धर्मनिरपेक्ष है। लेकिन हाल के दिनों में उनके राजनीतिक रुख में एक दिलचस्प बदलाव देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के न्यू टाउन में दुर्गा मंदिर बनाने की घोषणा की, जहां ममता बनर्जी ने ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना का शिलान्यास किया। उद्घाटन का निमंत्रण राज्य सरकार की ओर से जारी किया गया, जिसमें यह भी उल्लेख था कि बंगाल की पारंपरिक दुर्गा पूजा को 2021 में यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया था और यह परियोजना उसी परंपरा को संरक्षित करने के लिए है।

समारोह के दौरान ममता ने स्थल पर लाल साड़ी और सफेद धोती रखी। इसका प्रतीकात्मक अर्थ बताया गया—जहां दुर्गा हैं, वहीं शिव हैं और जहां शिव हैं, वहीं दुर्गा, यानी ‘गौरी’ और ‘हर’ का संगम। ममता ने उत्तर बंगाल में महाकाल शिव मंदिर बनाने की योजना की भी घोषणा की।

बीजेपी नेतृत्व इन कदमों को राजनीतिक दबाव का नतीजा मानता है और कहता है कि इससे तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों की धार कम करने की कोशिश हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दुर्गा मंदिर बनाना गलत नहीं है, लेकिन ममता का यह कदम देर से उठाया गया और इसे दिखावटी भी माना जा सकता है।

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दरअसल, ममता की राजनीति ‘बंगाली हिंदुत्व’ की विशिष्ट पहचान पर आधारित है। बंगाली हिंदू संस्कृति शाक्त परंपरा, सांस्कृतिक बहुलता और गैर-शाकाहारी परंपराओं से जुड़ी है, जहां मछली को शुभ माना जाता है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की परंपरा भी इसी विविधतापूर्ण हिंदुत्व को दर्शाती है।

पहले ममता ने अपनी धार्मिक पहचान को सार्वजनिक रूप से उभारने से परहेज किया, लेकिन अब वह इसे खुलकर सामने ला रही हैं। यह रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव में कारगर रही, जबकि 2026 में इसका क्या असर होगा, यह देखना बाकी है। ममता ‘दिल्ली की बाहरी ताकत’ बनाम ‘बंगाल की अस्मिता’ का नैरेटिव गढ़कर मोदी-शाह को चुनौती दे रही हैं, वहीं बीजेपी मुस्लिम वोटों के बंटवारे की रणनीति पर काम कर रही है।

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