जापान यात्रा संपन्न कर पीयूष गोयल ने भारत में सेमीकंडक्टर और तकनीकी निवेश बढ़ाने पर दिया जोर
पीयूष गोयल की जापान यात्रा में सेमीकंडक्टर, एआई, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर जोर रहा। भारत ने अगले दशक में 10 ट्रिलियन येन जापानी निवेश लक्ष्य को आगे बढ़ाया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी आधिकारिक जापान यात्रा संपन्न कर ली है। इस दौरान उन्होंने जापानी सरकार के वरिष्ठ नेताओं, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं। यात्रा का उद्देश्य भारत में निवेश को तेज करना, औद्योगिक साझेदारी मजबूत करना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देना रहा।
पीयूष गोयल की यात्रा टोक्यो, नागोया और ओसाका तक फैली रही। उन्होंने भारत में मौजूदा या बढ़ती रुचि रखने वाली 30 से अधिक प्रमुख जापानी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के नेतृत्व के साथ बातचीत की। यात्रा का मुख्य फोकस विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक जापानी निवेश को बढ़ावा देना था।
गोयल ने एमयूएफजी, मिजुहो, नोमुरा, निप्पॉन लाइफ, डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान और मॉर्गन स्टेनली एमयूएफजी सिक्योरिटीज जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। बैठकों में भारत की विनिर्माण, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और वित्तीय व्यवस्था में पूंजी प्रवाह बढ़ाने तथा जापानी संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई यात्रा के प्रमुख विषयों में रहे। सेमीकंडक्टर एवं एआई गोलमेज बैठक में गोयल ने कहा कि भारत वर्ष 2032 तक 150 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित सेमीकंडक्टर मांग को देखते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने सरकार की छह-स्तंभीय रणनीति का उल्लेख किया, जिसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी एवं सामग्री, फैब्रिकेशन, एटीएमपी/ओसैट, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास शामिल हैं। गोयल ने कहा कि भारत की युवा और कुशल प्रतिभा को जापान की उन्नत तकनीक, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और विनिर्माण क्षमता से जोड़कर विश्वस्तरीय तकनीकी ढांचा तैयार किया जा सकता है।
जापानी कंपनियों ने सेमीकंडक्टर सामग्री एवं उपकरण, पावर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत में विस्तार की रुचि दिखाई। चर्चा में धोलेरा और साणंद जैसे उभरते सेमीकंडक्टर क्लस्टरों में विश्वसनीय बिजली, अति-शुद्ध जल, कुशल मानव संसाधन और सामाजिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।
यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन जापानी येन के निजी निवेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाना था। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2025 की जापान यात्रा के दौरान तय किया गया था।
गोयल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री अकाजावा रयोसेई, जेट्रो, जेबीआईसी और जाइका के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से भी व्यापार, निवेश, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और विनिर्माण सहयोग पर चर्चा की। नागोया में आयोजित रोडशो में 80 से अधिक जापानी कंपनियों ने भाग लिया।
मंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और देश 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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