कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार, प्राचीन परंपरा से आधुनिक साहित्य को नया रूप देने के लिए सम्मान
कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार मिला। स्वीडिश अकादमी ने प्राचीन साहित्यिक परंपराओं से संवाद करते हुए आधुनिक साहित्य को नए रूप देने पर सम्मानित किया।
कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया। स्वीडिश अकादमी ने स्टॉकहोम में पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें यह सम्मान “शास्त्रीय परंपरा के साथ चंचल संवाद करते हुए समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़ने वाली उनकी साहसिक और अभिनव साहित्यिक रचनाओं” के लिए दिया गया है। इस वर्ष पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर है।
76 वर्षीय ऐन कार्सन का साहित्यिक करियर कविता, गद्य, अनुवाद, शास्त्रीय अध्ययन और अध्यापन तक फैला हुआ है। उनकी रचनाओं में अलग-अलग साहित्यिक विधाओं की सीमाएं अक्सर धुंधली दिखाई देती हैं। नोबेल पुरस्कार की घोषणा से पहले भी कार्सन को संभावित विजेताओं में प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे के साथ उनका नाम सट्टा बाजारों में भी शीर्ष दावेदारों में शामिल था।
शास्त्रीय साहित्य से गहरा जुड़ाव
1950 में कनाडा के टोरंटो में जन्मी कार्सन ने अपने अकादमिक जीवन की शुरुआत से ही प्राचीन साहित्य और शास्त्रीय दुनिया में गहरी रुचि विकसित की। वर्ष 1981 में उन्होंने क्लासिक्स विषय में अपनी डॉक्टरेट थीसिस ‘ओडी एट एमो एर्गो सम’ प्रकाशित की।
उनके लेखन में प्राचीन ग्रंथों, मिथकों और भाषाई अध्ययन को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा गया है। शब्दों की उत्पत्ति और व्युत्पत्ति के प्रति उनकी रुचि ने उनकी विशिष्ट साहित्यिक शैली को आकार दिया।
‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड’ से मिली पहचान
कार्सन की चर्चित रचनाओं में 1998 का पद्य उपन्यास ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड शामिल है। यह यूनानी मिथक के पात्र हेराक्लीज़ से प्रेरित आधुनिक कहानी है, जिसमें पहचान, इच्छा और किशोरावस्था जैसे विषयों को नई शैली में प्रस्तुत किया गया है।
नोबेल सम्मान कार्सन के उस साहित्यिक योगदान को रेखांकित करता है, जिसमें उन्होंने कविता, कथा, अनुवाद और शास्त्रीय अध्ययन के बीच पारंपरिक सीमाओं को चुनौती दी। उनका लेखन प्राचीन और आधुनिक दुनिया के बीच नए संबंध स्थापित करने के लिए जाना जाता है।
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