उधार के स्केट्स पर इतिहास रचने वाले चंडीगढ़ के आइस वॉरियर्स
खेलो इंडिया विंटर गेम्स में चंडीगढ़ की पुरुष आइस हॉकी टीम ने रजत और महिला टीम ने कांस्य पदक जीतकर सीमित संसाधनों के बावजूद ऐतिहासिक सफलता हासिल की।
चंडीगढ़ के आइस हॉकी खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद इतिहास रच दिया है। हाल ही में लेह में आयोजित खेलो इंडिया विंटर गेम्स में चंडीगढ़ की पुरुष और महिला टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक जीते और गुरुवार को शहर लौटने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पुरुष टीम ने ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम किया, जबकि महिला टीम ने कांस्य पदक जीतकर चंडीगढ़ का गौरव बढ़ाया।
खास बात यह रही कि पुरुष टीम ने फाइनल मुकाबले में भारतीय सेना की टीम के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी की। हालांकि वे 2-3 से मुकाबला हार गए, लेकिन उनका जुझारूपन और आत्मविश्वास दर्शकों के दिलों में उतर गया। टीम के कोच गौरव रहेजा, जो स्वयं एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं, के लिए यह उपलब्धि बेहद खास थी। उन्होंने कहा कि महज एक साल पहले तक खिलाड़ी किराए के जूतों और स्केट्स में अभ्यास कर रहे थे और बर्फ पर ब्लेड के संतुलन से जूझ रहे थे।
महिला टीम ने भी खेलो इंडिया विंटर गेम्स में दमदार खेल दिखाते हुए कांस्य पदक हासिल किया। सीमित सुविधाओं और बर्फ तक बेहद कम पहुंच वाले शहर से निकलकर इस स्तर पर प्रदर्शन करना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि निरंतर अभ्यास, कोच का मार्गदर्शन और टीम भावना ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
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चंडीगढ़ लौटने पर खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों और तालियों के साथ स्वागत किया गया। स्थानीय खेल प्रेमियों और प्रशासन ने उनकी उपलब्धि की सराहना की और भविष्य में बेहतर सुविधाएं देने का आश्वासन दिया। कोच रहेजा ने इसे शहर के लिए “टर्निंग पॉइंट” बताते हुए कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को आइस हॉकी जैसे खेलों की ओर प्रेरित करेगी।
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