सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली को मिलेगी अपनी एसडीआरएफ, 1,100 जवान संभालेंगे आपदा मोर्चा
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने 1,100 जवानों वाली एसडीआरएफ बनाने का फैसला किया। एनडीआरएफ प्रशिक्षण देगा, जबकि अग्निशमन और सिविल डिफेंस को भी विशेष प्रशिक्षण मिलेगा।
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी की आपदा प्रबंधन क्षमता मजबूत करने के लिए अपनी अलग राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) बनाने का फैसला किया है। रविवार को सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद यह कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में एसडीआरएफ के गठन का निर्णय लिया गया। प्रस्तावित बल में अधिकतम 1,100 जवान होंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) इन जवानों को विशेष प्रशिक्षण देगा, ताकि किसी भी प्राकृतिक या मानवजनित आपदा के दौरान तत्काल बचाव और राहत अभियान शुरू किया जा सके।
बैठक में दिल्ली के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद, महानिरीक्षक नरेंद्र बुंदेला और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एनडीआरएफ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रस्तावित एसडीआरएफ की कार्यप्रणाली और तैनाती की जानकारी दी।
यह बल दिल्ली सरकार के अधीन काम करेगा और आपात स्थिति में तेजी से मौके पर पहुंचकर लोगों को बचाने तथा जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद करेगा। एनडीआरएफ स्थानीय जरूरतों और दिल्ली की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विशेष उपकरणों में भी सहायता करेगा।
सरकार अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को भी विशेष प्रशिक्षण देगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़े उपलब्ध उपकरणों और उनके भंडारण स्थानों की जानकारी संबंधित विभागों के साथ साझा करने का निर्देश दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में अपनी एसडीआरएफ की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। घनी आबादी और तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे वाले महानगर के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल प्रतिक्रिया क्षमता जरूरी है।
बैठक में दिल्ली में एनडीआरएफ की मौजूदगी बढ़ाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। सरकार ने केंद्रीय, उत्तर और दक्षिण दिल्ली में अतिरिक्त स्थान देने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
और पढ़ें: DNA सैंपल, एयरटाइट बैग और खास पहचान नंबर: नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान की नई योजना