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मांड्या में SSLC परिणाम सुधारने के लिए ईच वन टीच वन मॉडल शुरू

मांड्या में SSLC परिणाम सुधारने के लिए ‘ईच वन टीच वन’ मॉडल शुरू किया गया। कमजोर छात्रों को अतिरिक्त मार्गदर्शन और सहपाठी सहयोग से बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

कर्नाटक के मांड्या जिले में SSLC (माध्यमिक विद्यालय समापन प्रमाणपत्र) परीक्षा के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से ‘ईच वन टीच वन’ मॉडल की शुरुआत की गई है। इस पहल को जिला पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंदिनी के.आर. के निर्देश पर लागू किया गया है।

नंदिनी के.आर. ने शिक्षा विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन छात्रों पर विशेष ध्यान दें जो एसएसएलसी की तीनों चरणों की प्रारंभिक परीक्षाओं (प्रिपरेटरी एग्जाम) में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन छात्रों की शैक्षणिक स्थिति को सुधारने के लिए ‘ईच वन टीच वन’ मॉडल को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

उन्होंने बताया कि पहले प्रिपरेटरी एग्जाम-1 में लगभग 68 प्रतिशत छात्र ही पास हुए थे, लेकिन लगातार प्रयासों और अतिरिक्त मार्गदर्शन के कारण प्रिपरेटरी एग्जाम-3 में पास प्रतिशत बढ़कर 86 प्रतिशत हो गया है। यह सुधार शिक्षकों और प्रशासन की संयुक्त कोशिशों का परिणाम है।

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‘ईच वन टीच वन’ मॉडल के तहत पढ़ाई में अच्छे छात्र कमजोर छात्रों की मदद करेंगे। इसके साथ ही शिक्षक भी अतिरिक्त कक्षाएं और मार्गदर्शन सत्र आयोजित करेंगे, ताकि जो छात्र पिछड़ रहे हैं उन्हें बेहतर समझ और अभ्यास का अवसर मिल सके।

अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अंतिम एसएसएलसी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कुल परिणाम बेहतर हो और अधिक से अधिक छात्र सफल होकर आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित हों।

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