एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष में सहमति नहीं, संसद में गतिरोध जारी रहने के आसार
एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई है। विपक्ष इसे कठोर बताते हुए विरोध कर रहा है, जबकि सरकार बहस चाहती है।
विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए बिल) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है। सरकार ने विधेयक पर चर्चा के लिए विपक्ष से संपर्क किया है, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में गुरुवार को संसद में भी हंगामा जारी रहने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार चाहती है कि विधेयक को लोकसभा में पेश करने से पहले सभी तथ्यों को सदन के सामने रखा जाए और इस पर विस्तृत चर्चा हो। सरकार की कोशिश है कि विधेयक को विरोध और व्यवधान के बीच नहीं, बल्कि व्यापक सहयोग के साथ पारित कराया जाए।
बुधवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद के मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्ष का सहयोग मांगा। यह पिछले 10 दिनों में रिजिजू और राहुल गांधी के बीच दूसरी मुलाकात थी। हालांकि, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया।
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कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को "कठोर" बताते हुए इसका विरोध किया है। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी इस विधेयक का वर्तमान स्वरूप में समर्थन नहीं करेगी।
एफसीआरए कानून यह तय करता है कि भारतीय नागरिक, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ट्रस्ट, संस्थाएं और कंपनियां विदेशों से मिलने वाले धन, प्रतिभूतियों या वस्तुओं को किस तरह प्राप्त और उपयोग कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार, नए संशोधन में विदेशी वित्त पोषित संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही पंजीकरण को निर्धारित उद्देश्यों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ने की बात कही गई है।
वहीं, विपक्ष का आरोप है कि संशोधन से सरकार को एनजीओ और अन्य संस्थाओं की संपत्तियों पर अधिक अधिकार मिल जाएंगे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इससे सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और चैरिटेबल संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो विदेशी सहायता पर निर्भर हैं।
सरकार का कहना है कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों ने विदेशी फंडिंग और प्रभाव से जुड़े नियमों को मजबूत किया है। वहीं, विपक्षी दलों जैसे द्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी मौजूदा स्वरूप में विधेयक का समर्थन करने से इनकार किया है।
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा और अब देखना होगा कि सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
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