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नाबालिग मरीज के स्तनों को छूना सामान्य स्त्री रोग जांच नहीं, गुवाहाटी हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग मरीज के स्तनों को छूना स्त्री रोग जांच की सामान्य प्रक्रिया नहीं है। अदालत ने दोषी डॉक्टर की सजा उम्र के आधार पर घटाई।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 17 साल पुराने एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि नाबालिग मरीज के स्तनों को छूने की हरकत को सामान्य स्त्री रोग संबंधी जांच का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अदालत ने दोषी डॉक्टर की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि चिकित्सा जांच के नाम पर अनुचित व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह मामला स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप कुमार बरुआ से जुड़ा है। डॉक्टर पर आरोप था कि उन्होंने एक नाबालिग मरीज की जांच के दौरान अनुचित तरीके से स्पर्श किया था। मामले की सुनवाई करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने डॉक्टर की दोषसिद्धि को कायम रखा और कहा कि ऐसी गतिविधि को नियमित स्त्री रोग परीक्षण की प्रक्रिया नहीं बताया जा सकता।

हालांकि, अदालत ने डॉक्टर की अधिक उम्र को देखते हुए सजा में कुछ राहत दी। हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 के तहत दी गई सजा को संशोधित करते हुए उन्हें 5,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उन्हें दो महीने की कठोर कैद भुगतनी होगी।

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आईपीसी की धारा 354 के तहत किसी महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना अपराध माना जाता है। अदालत ने इस प्रावधान के तहत डॉक्टर की जिम्मेदारी और पेशेवर आचरण पर भी जोर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चिकित्सा पेशे में डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि वे जांच और इलाज के दौरान मरीज की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान का पूरा ध्यान रखें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी चिकित्सकीय प्रक्रिया का हवाला देकर ऐसी हरकतों को उचित नहीं ठहराया जा सकता, जो मरीज की गरिमा को नुकसान पहुंचाती हों।

17 साल पुराने इस मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक जिम्मेदारी और मरीजों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

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