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पेपर लीक विधेयक पर गौरव गोगोई का हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान का ऐसे स्वागत हुआ जैसे पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों

लोकसभा में गौरव गोगोई ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को दिखावा बताया। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार पर परीक्षा अनियमितताओं को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर परीक्षा प्रणाली में हो रही अनियमितताओं को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया संशोधन केवल "दिखावा" है और इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लगेगी।

बहस की शुरुआत में गोगोई ने असम में आई बाढ़ का मुद्दा उठाया और उसके बाद विधेयक पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार ने जिस कानून को ऐतिहासिक बताया था, उसके लागू होने के बावजूद वर्ष 2025 और उसके बाद भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए। उन्होंने सवाल किया कि यदि पहले से बना कानून इतना प्रभावी था तो फिर बार-बार पेपर लीक की घटनाएं क्यों सामने आईं।

गौरव गोगोई ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत ऐसे किया, मानो वह "पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों।"

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कांग्रेस सांसद ने वर्ष 2024 के नीट परीक्षा विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने शुरुआत में पेपर लीक से इनकार किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में सामने आई गंभीर घटनाओं के बावजूद सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर ध्यान देने की सलाह देती है।

उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि एजेंसी में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है तो 47 अधिकारियों को सेवा से हटाने की नौबत कैसे आई। उन्होंने नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि आरोपपत्र दाखिल किए गए अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

उधर, केंद्र सरकार ने विधेयक के माध्यम से पेपर लीक के मामलों में न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया है। संगठित अपराध के मामलों में सात वर्ष से लेकर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन तथा विशेष परिस्थितियों में केंद्र द्वारा विशेष जांच कार्यबल गठित करने का भी प्रावधान किया गया है।

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