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गुजरात में पंचायत ऑडिट के बाद ‘एग्जिट कॉन्फ्रेंस’ अनिवार्य, अनियमितताओं पर होगी त्वरित कार्रवाई

गुजरात सरकार ने पंचायतों के वार्षिक ऑडिट के बाद एग्जिट कॉन्फ्रेंस अनिवार्य की है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई, पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीण विकास निधि के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

गुजरात सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक ऑडिट के बाद ‘एग्जिट कॉन्फ्रेंस’ आयोजित करना अनिवार्य कर दिया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्राम स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत बनाना है, ताकि ऑडिट में सामने आने वाली गंभीर गड़बड़ियों पर बिना देरी के आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

पंचायत, ग्रामीण आवास एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 28 जुलाई को जारी एक सरकारी परिपत्र के अनुसार, अब प्रत्येक ग्राम पंचायत, तालुका पंचायत और जिला पंचायत के वार्षिक ऑडिट के तुरंत बाद संबंधित जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) एग्जिट कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे। इससे पहले ऑडिट पूरा होने के बाद अनुशासनात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई में अक्सर काफी विलंब हो जाता था।

सरकार का कहना है कि यह पहल स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े मामलों में शीघ्र निर्णय लेना संभव होगा।

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मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व तथा पंचायत मंत्री ऋषिकेश पटेल और राज्य मंत्री संजयसिंह महीड़ा के मार्गदर्शन में इस सुधार को लागू किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक एग्जिट कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता संबंधित जिला विकास अधिकारी करेंगे। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी केवल गंभीर ऑडिट टिप्पणियों को बैठक में प्रस्तुत करेंगे। इन बैठकों में कथित गबन, नियमों के विरुद्ध खरीद, अवैध नियुक्तियां, वित्तीय अनियमितताएं तथा अन्य प्रमुख प्रशासनिक कमियों की समीक्षा की जाएगी।

ऑडिट निष्कर्षों के आधार पर जिला विकास अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर अनुशासनात्मक, निवारक या कानूनी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार होगा। इससे लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण होने वाली देरी कम होगी और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि ऑडिट रिपोर्टों में दर्ज गंभीर टिप्पणियां केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर प्रभावी प्रशासनिक निर्णय लिए जाएं। इससे पंचायती राज संस्थाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और सार्वजनिक धन की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक व्यय की सख्त निगरानी से ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धन का उपयोग सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सामाजिक अवसंरचना तथा अन्य गांव विकास परियोजनाओं में निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप होगा। साथ ही सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की संभावनाएं भी कम होंगी।

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