भारत ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट पर पाकिस्तान को परमाणु खतरे के रूप में चिन्हित करने पर जताई सहमति
भारत ने अमेरिकी रिपोर्ट पर पाकिस्तान के परमाणु खतरे की पुष्टि की। पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता और आतंकवादी गतिविधियों पर चिंता जताई गई। भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर है।
अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान को परमाणु खतरे के रूप में चिन्हित किए जाने पर भारत ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु प्रसार का इतिहास गुप्त (गोपनीय) रहा है और इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि उनका वैश्विक स्तर पर कितना खतरा है।
18 मार्च, 2026 को अमेरिकी खुफिया निदेशक की ओर से जारी वार्षिक खतरे की रिपोर्ट में पाकिस्तान को अमेरिका के लिए गंभीर परमाणु खतरे के रूप में बताया गया है। अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गब्बर्ड ने रिपोर्ट में पाकिस्तान की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल और लंबी दूरी की मारक क्षमता को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट में रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान को अमेरिका की सुरक्षा के लिए संभावित खतरे के रूप में उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक गतिविधियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। अल-कायदा और आईएसआईएस के खतरे कम हुए हैं, लेकिन खतरा अभी भी मौजूद है, विशेषकर दक्षिण एशिया में आईएसआईएस खुरासान प्रांत पर। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने 2025 में इराक, पाकिस्तान, सोमालिया और सीरिया में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए, जिससे कई प्रमुख आतंकवादी नेता खत्म किए गए।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी ध्यान देते हुए रंधीर जयसवाल ने कहा कि देश अपने तेल और गैस के स्रोत विविध कर रहा है। भारत विभिन्न देशों से क्रूड ऑयल और एलपीजी आयात कर रहा है, और रूस सहित कई विकल्पों को अपनाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
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