भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग दोहराई, कहा- सुरक्षा परिषद में बदलाव से ही बनेगा भविष्य के लिए सक्षम बहुपक्षवाद
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने पर जोर दिया। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा आज की वैश्विक चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं है।
भारत ने मंगलवार को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में व्यापक सुधारों की मांग दोहराते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद में तत्काल बदलाव जरूरी हैं। भारत ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को मौजूदा दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि बहुपक्षवाद को भविष्य के लिए मजबूत किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक ‘मेकिंग मल्टीलेटरलिज्म फिट फॉर द फ्यूचर’ को संबोधित करते हुए भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि सुरक्षा परिषद, महासभा और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) में सुधार समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार में देरी से संयुक्त राष्ट्र के प्रति वैश्विक समर्थन कमजोर हो सकता है। राजदूत ने कहा कि हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा प्रभावित हुई है, जिसका मुख्य कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों में सुरक्षा परिषद की प्रभावी भूमिका का अभाव है।
राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि सुरक्षा परिषद का मौजूदा ढांचा लगभग 80 वर्ष पुराना है और इसे 1940 के दशक की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था कई मामलों में मानवीय पीड़ा को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुई है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सहित व्यापक सुधारों की मांग करता रहा है।
भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, लेकिन अभी तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है। भारत का कहना है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
राजदूत ने कहा कि भारत वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार के सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने महासभा को मजबूत करने और ईसीओएसओसी की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को बेहतर तरीके से हासिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति विकास की प्रक्रिया से पीछे न छूटे और जरूरत वाले क्षेत्रों में संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो।
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