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भारत-वियतनाम संबंधों को नई ऊंचाई: व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति

भारत और वियतनाम ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया। व्यापार, संस्कृति, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग पर जोर देते हुए दोनों देशों ने 2030 तक आर्थिक लक्ष्य तय किए।

भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति टो लाम का पद संभालने के एक महीने के भीतर भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वियतनाम भारत के साथ संबंधों को कितनी प्राथमिकता देता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी यात्रा की शुरुआत बोधगया से हुई, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि पिछले वर्ष भारत से वियतनाम भेजे गए बौद्ध अवशेषों को 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने बताया कि भारत, माई सन मंदिर परिसर और न्हान टॉवर सहित प्राचीन चाम सभ्यता के मंदिरों के पुनरुद्धार पर काम कर रहा है। साथ ही, चाम पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा, ताकि साझा विरासत को संरक्षित रखा जा सके।

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आर्थिक सहयोग की बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अब इसे 2030 तक 25 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि नए समझौते भारतीय दवाओं को वियतनाम में बेहतर पहुंच देंगे और कृषि, मत्स्य तथा पशु उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देंगे।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद लेंगे, जबकि भारत में वियतनाम के ड्यूरियन और पोमेलो का आनंद लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कनेक्टिविटी और डिजिटल सहयोग को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बढ़ रहा है और जल्द ही भारत का यूपीआई और वियतनाम की तेज भुगतान प्रणाली आपस में जुड़ेंगी।

रणनीतिक सहयोग पर बोलते हुए उन्होंने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘सागर’ दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होने के लिए वियतनाम का आभार भी व्यक्त किया।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और यह साझेदारी दोनों देशों को विकसित राष्ट्र बनने में मदद करेगी।

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