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होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा ईरान

ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार और भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

ईरान अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल टैक्स) लगाने पर विचार कर रहा है। यह कदम अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब माना जा रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की संसद इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत इस मार्ग का उपयोग करने वाले देशों को ऊर्जा, खाद्य और अन्य सामान के परिवहन के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान पहले से ही उन जहाजों की आवाजाही बाधित कर रहा है, जिन्हें वह अपने विरोधी देशों से जुड़ा मानता है।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने संकेत दिया है कि युद्ध के बाद इस जलडमरूमध्य के लिए एक “नया नियम” लागू किया जा सकता है। इसके तहत ईरान उन देशों के जहाजों पर सख्ती कर सकता है, जिन्होंने उस पर प्रतिबंध लगाए हैं।

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हालांकि तनाव के बावजूद, मार्च की शुरुआत से अब तक करीब 90 जहाज इस मार्ग से गुजर चुके हैं। इनमें कई तेल टैंकर भी शामिल हैं। कई जहाज “डार्क ट्रांजिट” के जरिए निगरानी से बचते हुए यात्रा कर रहे हैं। अनुमान के मुताबिक, ईरान इस दौरान 1.6 करोड़ बैरल से अधिक तेल का निर्यात कर चुका है।

तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से इस मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए नौसैनिक तैनाती की अपील की है।

इस स्थिति से वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर गहरा असर पड़ सकता है।

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