देश की एक लाख मछली पकड़ने वाली नौकाओं में जल्द लगेंगे इसरो के ट्रांसपोंडर, मछुआरों की सुरक्षा और संचार होगा मजबूत
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इसरो विकसित वीसीएसएस लागू करने को मंजूरी दी है। एक लाख नौकाओं में ट्रांसपोंडर लगाकर मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
देशभर के लगभग एक लाख समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों में जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित स्वदेशी ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने मछुआरों की सुरक्षा, संचार और नौवहन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम (वीसीएसएस) को पूरे देश में लागू करने की योजना को मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत लगभग 364 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन को स्वीकृति प्रदान की। इस योजना के तहत समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों पर ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे, पृथ्वी स्टेशन और आवश्यक संचार अवसंरचना विकसित की जाएगी तथा क्षेत्रीय भाषाओं में ‘नभमित्र’ मोबाइल एप्लिकेशन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के अनुसार पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इस परियोजना का वित्तपोषण केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में किया जाएगा, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को इस योजना के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
और पढ़ें: आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: पूर्व आप नेता ताहिर हुसैन को उम्रकैद
इसरो द्वारा विकसित वीसीएसएस का उद्देश्य समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों की निगरानी, नियंत्रण और सर्विलांस प्रणाली को आधुनिक बनाना है। इसके साथ ही इसरो ने ‘नभमित्र’ एप विकसित किया है, जो समुद्री मछुआरा समुदाय को वास्तविक समय (रियल-टाइम) में संचार और सहायता सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
इस एप्लिकेशन में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इनमें जहाज की नियमित स्थिति की जानकारी, दो-तरफा संदेश भेजने की सुविधा, आपातकालीन और एसओएस अलर्ट, जियो-फेंसिंग आधारित सीमा पार करने की स्वतः चेतावनी, मौसम और चक्रवात संबंधी सलाह, आपात मौसम अलर्ट, संभावित मत्स्य क्षेत्र (पीएफजेड) की जानकारी, नौवहन सहायता तथा ई-टोकन और यात्रा घोषणा प्रणाली जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली आपातकालीन परिस्थितियों और खराब मौसम के दौरान खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएगी, जिससे मछुआरों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके अलावा, समय पर सीमा संबंधी चेतावनी मिलने से भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाज अनजाने में पड़ोसी देशों की समुद्री सीमा में प्रवेश करने से बच सकेंगे।
परियोजना के अंतर्गत देशभर में अधिसूचित 1,547 मत्स्य अवतरण केंद्रों (फिश लैंडिंग सेंटर) में से 423 केंद्रों पर आधुनिक संचार अवसंरचना विकसित की जाएगी। इन केंद्रों का चयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने परिचालनरत नौकाओं की संख्या, स्थानीय मछुआरा समुदाय की निर्भरता, मछली उतारने की मात्रा, मछली बाजारों और प्रसंस्करण इकाइयों की निकटता, तकनीकी एवं वित्तीय व्यवहार्यता, उपलब्ध संसाधनों तथा वैधानिक मानकों के आधार पर किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक 350 अधिसूचित मत्स्य अवतरण केंद्र हैं। इसके बाद तमिलनाडु में 301 और केरल में 204 मत्स्य अवतरण केंद्र स्थित हैं। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से समुद्री मत्स्य क्षेत्र में सुरक्षा, संचार और तकनीकी दक्षता को नई मजबूती मिलेगी।