झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद: सरकार ने सीआईडी-ईडी जांच का ऐलान किया, छात्र सीबीआई जांच की मांग पर अड़े
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षा अनियमितताओं की सीआईडी और ईडी जांच का भरोसा दिया, लेकिन छात्र सीबीआई जांच और कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध जारी है। रविवार को रांची में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बैठक के बाद सरकार ने दावा किया कि उसने छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे खारिज करते हुए सोमवार को विधानसभा मार्च निकालने का ऐलान किया है।
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि सरकार 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा तथा 2023 और 2025 की बैकलॉग भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत है। कथित अनियमितताओं के आपराधिक पहलुओं की जांच अपराध जांच विभाग यानी सीआईडी करेगा, जबकि संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय से अनुरोध किया जाएगा। आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों में आरोपपत्र दाखिल करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालत गठित करने की बात भी कही गई है।
हालांकि, सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग स्वीकार नहीं की। सरकार ने निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है।
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छात्र नेताओं का कहना है कि उनकी मुख्य मांग सीबीआई जांच है और सीआईडी जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। प्रदर्शनकारी वर्ष 2019 के बाद आयोजित जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी परीक्षाओं को रद्द करने, कथित परीक्षा माफिया पर कार्रवाई, श्रेणीवार कटऑफ, ओएमआर और रिस्पॉन्स शीट सार्वजनिक करने तथा पारदर्शी भर्ती कैलेंडर की मांग कर रहे हैं।
इस बीच झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, अनीमा हांसदा और जमाल अहमद ने इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
छात्रों ने सोमवार के विधानसभा मार्च को शांतिपूर्ण रखने की अपील की है। उन्होंने एकजुट होकर मार्च करने, यातायात बाधित नहीं करने, पुलिस से टकराव से बचने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
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