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कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार सोमवार को संभव, शपथ से पहले कांग्रेस नेतृत्व करेगा मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर

कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार सोमवार को होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर मंत्रियों की अंतिम सूची तय करेंगे।

कर्नाटक में लंबे समय से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार अब सोमवार, 3 अगस्त को होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के शपथ ग्रहण के कई सप्ताह बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया था, लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व अंतिम सूची को मंजूरी देने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार संभावित मंत्रियों के नामों पर रविवार देर शाम या सोमवार सुबह तक अंतिम फैसला लिया जा सकता है, जिसके बाद सोमवार शाम शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने की संभावना है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। रिपोर्ट के अनुसार यह बैठक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई। बैठक में संभावित मंत्रियों के नामों पर विस्तार से चर्चा की गई और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय एवं धार्मिक संतुलन सहित विभिन्न राजनीतिक पहलुओं को ध्यान में रखा गया।

बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद भी मौजूद रहे। सूत्रों का कहना है कि संभावित उम्मीदवारों की सूची पर अंतिम मुहर रविवार रात या सोमवार सुबह तक लग जाएगी।

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार समेत केवल 14 मंत्री ही मंत्रिमंडल में शामिल हैं। ऐसे में अभी कई पद खाली हैं।

मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। विशेष रूप से सिद्धारमैया समर्थक और डी.के. शिवकुमार समर्थक नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

इससे पहले चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा थी, लेकिन डी.के. शिवकुमार इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थे। अब पार्टी नेतृत्व विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व देते हुए संतुलित मंत्रिमंडल बनाने पर जोर दे रहा है।

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