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लोहारडोंगरी लौह अयस्क परियोजना पर रोक; नागपुर में सक्रिय कार्यकर्ता ने उपवास समाप्त किया

महाराष्ट्र सरकार ने चंद्रपुर जिले के लोहारडोंगरी लौह अयस्क परियोजना पर अस्थायी रोक लगा दी, स्थानीय कार्यकर्ता बंदू धोट्रे ने पर्यावरणीय चिंताओं पर उपवास समाप्त किया।

महाराष्ट्र सरकार ने चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तालुका में प्रस्तावित लोहारडोंगरी लौह अयस्क परियोजना पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम स्थानीय कार्यकर्ता बंदू धोट्रे द्वारा उठाए गए उपवास और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंता के मद्देनजर लिया गया।

विशेष ड्यूटी अधिकारी उदय ढगे ने धोट्रे को लिखे पत्र में बताया कि सरकार को ब्रह्मपुरी वन प्रभाग के मौजा लोहारडोंगरी में प्रस्तावित ओपनकास्ट लौह अयस्क परियोजना को लेकर एक प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है। इसके मद्देनजर सरकार ने परियोजना पर आगे की कार्रवाई फिलहाल रोक दी है।

महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने 6 जनवरी को परियोजना को वन्यजीव अनुमति के लिए सशर्त मंजूरी देने की सिफारिश की थी और इसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेज दिया था। इस सिफारिश की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने की थी।

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सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि राज्य वन मंत्री के साथ बैठक बुलाई जाएगी ताकि क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े विभिन्न मुद्दों और मांगों पर चर्चा की जा सके।

बंदू धोट्रे ने स्थानीय समुदाय और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लगभग सप्ताहभर का उपवास किया था। उपवास समाप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया है, और आगे परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

इस निर्णय से क्षेत्रीय वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदाय के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

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