महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई महायुति और महा विकास आघाड़ी की मुश्किलें
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति और महा विकास आघाड़ी दोनों को बागी उम्मीदवारों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई सीटों पर मुकाबला रोचक और जटिल बन गया है।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 17 सीटों पर होने वाले चुनाव में महायुति और महा विकास आघाड़ी (एमवीए) दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। हालांकि आधिकारिक उम्मीदवारों के अलावा बड़ी संख्या में बागी प्रत्याशियों की एंट्री ने दोनों गठबंधनों की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के गठबंधन महायुति ने सभी 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। लेकिन टिकट वितरण को लेकर सबसे अधिक असंतोष इसी गठबंधन में देखने को मिल रहा है। संभाजीनगर-जालना सीट पर शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने टिकट भाजपा को मिलने से नाराज होकर अपने बेटे समीर सत्तार को बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया है।
रायगढ़ में एनसीपी उम्मीदवार अनिकेत तटकरे को जुईली दलवी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यवतमाल में शिवसेना उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी के खिलाफ भाजपा के नितिन भुतड़ा और एनसीपी के साजिद बेग स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और शरद पवार गुट की एनसीपी से मिलकर बनी महा विकास आघाड़ी भी आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। नांदेड़ में कांग्रेस उम्मीदवार रामदास सुमठणकर को पार्टी के भीतर से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं भंडारा-गोंदिया, सांगली और सोलापुर जैसे क्षेत्रों में भी कई बागी उम्मीदवारों ने चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी संख्या में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकती है। इससे कई सीटों पर नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं। यह स्थिति दोनों गठबंधनों के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही असंतुष्टि और अंतर्विरोधों को भी उजागर करती है।
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