जौहर विश्वविद्यालय को बड़ी राहत, मुरादाबाद आयुक्त ने ध्वस्तीकरण आदेश पर लगाई रोक
मुरादाबाद आयुक्त ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई फिलहाल स्थगित हो गई।
उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बड़ी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल के आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने सोमवार को विश्वविद्यालय के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। इस फैसले के बाद मामले में अंतिम निर्णय होने तक विश्वविद्यालय के खिलाफ सभी प्रशासनिक कार्रवाई फिलहाल स्थगित रहेगी।
गौरतलब है कि 15 जुलाई को रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का दावा था कि इन भवनों का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्र के बिना किया गया है।
यह कार्रवाई एक क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत निर्माण का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद आरडीए ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया।
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान ने की थी। यह विश्वविद्यालय रामपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने विश्वविद्यालय को "शिक्षा का मंदिर" बताते हुए इसे बचाने की अपील की।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर ध्वस्तीकरण अभियान रोकने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने 45 विधायकों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन भी सौंपा।
इस मामले में कांग्रेस ने भी समाजवादी पार्टी का समर्थन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसी शैक्षणिक संस्थाएं किसी सरकार या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की साझा धरोहर होती हैं।
अब सभी की नजरें इस मामले में मुरादाबाद आयुक्त के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।