कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टाइगर रिजर्व की मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत के बाद राज्य के सभी टाइगर रिजर्व की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। कान्हा में कुत्तों का टीकाकरण किया गया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के टाइगर रिजर्वों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के प्रसार और इससे बाघों की मौत के मामले में सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने राज्य के सभी नौ टाइगर रिजर्वों की स्थिति और वायरस को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में करीब 2500 कुत्तों का टीकाकरण किया गया है। यह कदम अप्रैल से अब तक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण आठ बाघों की मौत के बाद उठाया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सभी टाइगर रिजर्वों में सतर्कता बनाए रखनी चाहिए। अदालत ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी समय रहते आवश्यक कदम उठाएंगे और जहां भी टीकाकरण की जरूरत होगी, वहां कार्रवाई की जाएगी।
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कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों और अन्य मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से जंगली जानवरों में भी इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है।
मध्य प्रदेश देश में बाघों की बड़ी आबादी वाले राज्यों में शामिल है और यहां कई महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व मौजूद हैं। इनमें कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और अन्य संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
अदालत ने राज्य सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए क्या निगरानी व्यवस्था अपनाई जा रही है और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों जैसे दुर्लभ वन्यजीवों को संक्रमण से बचाने के लिए आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कुत्तों का नियमित टीकाकरण और निगरानी बेहद जरूरी है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य के वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को टाइगर रिजर्वों में बीमारी की रोकथाम और निगरानी व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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