नवीन पटनायक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की, सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को बताया गंभीर
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। बीजद सांसदों ने घायलों से मुलाकात की।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो स्थिति बनी है, वह बेहद गंभीर है और कई युवा छात्रों के साथ कथित रूप से हिंसा हुई है।
नवीन पटनायक ने मंगलवार को कहा, “मैंने दिल्ली में हो रही गंभीर स्थिति को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों के साथ बैठक की है। हालात बहुत गंभीर हैं। कई युवा छात्रों पर हिंसक कार्रवाई की गई है। बीजद सांसदों ने अस्पताल जाकर घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की है।”
उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सवाल किया गया था और मौजूदा परिस्थितियों में उनका मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब सीजेपी ने सोमवार को दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद बीजद के राज्यसभा सांसदों ने राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल पहुंचकर घायल प्रदर्शनकारियों का हाल जाना।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि झड़प के दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, 60 से अधिक प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं। हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं और घटना से जुड़े 250 से अधिक वीडियो की जांच की जा रही है, ताकि इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
विपक्षी दलों के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले भी जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने सीजेपी के नीट-यूजी पेपर लीक विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया और प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। शरद पवार ने कहा कि छात्रों के साथ हुआ व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।