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कड़ाके की ठंड से राजस्थान, हरियाणा, गुरुग्राम में पाला; पारा 0.6 डिग्री तक गिरा

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड से तापमान शून्य के करीब पहुंचा। राजस्थान, हरियाणा और एनसीआर में पाला पड़ा, जबकि IMD ने शीत लहर और घने कोहरे की चेतावनी जारी की।

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। घने कोहरे और शीत लहर के बीच कई इलाकों में तापमान शून्य के करीब या उससे नीचे पहुंच गया, जिससे इस मौसम की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई। हरियाणा के गुरुग्राम और पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में पारा शून्य से नीचे गिरकर माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

एनसीआर के फरीदाबाद और रेवाड़ी सहित कई क्षेत्रों में उप-शून्य के करीब तापमान दर्ज किया गया, जिससे जमीन पर पाला जम गया। गुरुग्राम में घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों के शीशों पर बर्फ की परत दिखी और सूखी घास सख्त हो गई। ग्रामीण इलाकों में खेतों की मेड़ और वाहनों की खिड़कियों पर पाला विशेष रूप से नजर आया।

मौसम विभाग के अनुसार, 11 जनवरी 1971 को गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। हालांकि, सभी वर्षों का आंकड़ा उपलब्ध न होने के कारण यह नहीं कहा जा सकता कि रविवार रात का तापमान रिकॉर्ड न्यूनतम था या नहीं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत में भीषण ठंड और घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है।

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दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.2 डिग्री कम है। यह 2023 के बाद जनवरी का सबसे ठंडा दिन रहा और लगातार दूसरे दिन शीत लहर की स्थिति बनी रही। अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा। IMD के अनुसार, 13 जनवरी को न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमशः 4 और 20 डिग्री के आसपास रह सकता है।

राजस्थान में कई जिलों में रात का तापमान 8 डिग्री से नीचे बना रहा। बीकानेर के लूणकरनसर (0.4 डिग्री) और चूरू (1.3 डिग्री) भी सबसे ठंडे इलाकों में रहे। घने कोहरे के कारण पश्चिमी राजस्थान में यातायात प्रभावित हुआ और लोग अलाव जलाकर ठंड से बचते दिखे। मौसम विभाग ने अगले दिन भी शीत लहर से गंभीर शीत लहर की स्थिति जारी रहने की संभावना जताई है।

कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी ठंड का असर बना हुआ है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए हल्की सिंचाई जैसी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है।

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