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नेपाल में बढ़ती मौतों के बीच शवगृहों में जगह की कमी, शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

नेपाल में भीषण बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 600 पार पहुंच गया है। शवगृहों में जगह कम पड़ रही है और कई शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। चार दिनों के भीतर मृतकों की संख्या 600 के पार पहुंच चुकी है और प्रशासन को आशंका है कि बचाव अभियान के दौरान और शव मिलने से यह आंकड़ा बढ़ सकता है। इस बीच अस्पतालों और शवगृहों में शव रखने के लिए जगह की कमी एक नई गंभीर समस्या बन गई है।

भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के शवगृहों में लगभग 350 शव रखने की क्षमता है, लेकिन अब मृतकों की संख्या इससे काफी अधिक हो चुकी है। इसके कारण अस्पतालों और प्रशासन के सामने शवों को सुरक्षित रखने और उनके परिजनों तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

अभी 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच अधिकारियों ने शवों को अस्थायी रूप से रखने के लिए विशेष सुविधाएं स्थापित की हैं। यहां शवों को कम तापमान में सुरक्षित रखा जा रहा है।

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नेपाल पुलिस के पुलिस अधीक्षक रमेश्वर पौडेल ने बताया कि बचाव दल जब कोई शव बरामद करता है तो सबसे पहले उसकी तस्वीर ली जाती है। यदि शव की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो उसे साफ करने के बाद तस्वीरें ली जाती हैं। इसके बाद शव के बैग पर पहचान संबंधी टैग लगाया जाता है और उसे अस्थायी केंद्र में भेजा जाता है।

उन्होंने बताया कि लापता लोगों के परिजन जब जानकारी लेने आते हैं, तो बरामद शवों की तस्वीरें उन्हें दिखाई जाती हैं। पहचान होने के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करके शव परिवार को सौंप दिया जाता है।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन शवों की पहचान करना है, जिनके चेहरे स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे मामलों में पुलिस उंगलियों के निशान और डीएनए नमूने एकत्र कर रही है।

कास्की जिले के पुलिस प्रमुख नवीन कार्की ने बताया कि शवों को अनिश्चितकाल तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। इसलिए निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय प्रशासन की मदद से टैग लगाए गए शवों का प्रबंधन किया जा रहा है।

शवों के प्रबंधन की जिम्मेदारी 2021 के अज्ञात और लावारिस शव प्रबंधन दिशानिर्देशों के तहत गठित समितियों की है। लेकिन लगातार नए शव मिलने के कारण स्थानीय समितियां अब केंद्रीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही हैं।

बढ़ते संकट के बीच नेपाल ने विदेशी सहायता स्वीकार करने का भी फैसला किया है। भारत और चीन की टीमें स्थानीय अधिकारियों के साथ खोज एवं बचाव अभियान में मदद करेंगी। नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दबाव और विदेशी नागरिकों के लापता होने के कारण सीमित संख्या में विशेषज्ञों को प्रभावित क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी गई है।

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