×
 

एनएफएचएस-6: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में बढ़ोतरी

एनएफएचएस-6 में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार दर्ज हुआ है, जबकि मोटापा और मधुमेह जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियां बढ़ी हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन भी तेजी से आगे बढ़ा।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के अनुसार भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े अधिकांश संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जबकि वयस्कों में मोटापा और मधुमेह जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों में वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

सर्वेक्षण के अनुसार, संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गया है। वहीं, 95.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) मिली, जबकि कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का अनुपात 58.5 प्रतिशत से बढ़कर 65.2 प्रतिशत पहुंच गया। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसव भी 89.4 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गए हैं।

परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी प्रगति दर्ज की गई है। गर्भनिरोधक उपयोग दर 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई, जबकि परिवार नियोजन की अपूर्ण आवश्यकता 9.4 प्रतिशत से घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई। देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.0 पर स्थिर बनी हुई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है।

और पढ़ें: भारत की अध्यक्षता में 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक संपन्न, स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने पर बनी सर्वसम्मति

बच्चों के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिला। 12 से 23 माह के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया। खसरा टीके की दूसरी खुराक का कवरेज 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत और रोटावायरस टीकाकरण 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत पहुंच गया। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बौनापन (स्टंटिंग) 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत और गंभीर कुपोषण (सीवियर वेस्टिंग) 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत हो गया।

हालांकि, सर्वेक्षण ने जीवनशैली संबंधी बीमारियों को लेकर चिंता भी जताई है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की दर 30.7 प्रतिशत और पुरुषों में 27.3 प्रतिशत हो गई है। मधुमेह या उच्च रक्त शर्करा की समस्या भी महिलाओं में 17.8 प्रतिशत और पुरुषों में 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि उच्च रक्तचाप के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

सरकार ने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत 20 जुलाई 2026 तक 94.87 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग का बजट पिछले एक दशक में 932 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,821.21 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे देश में स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

और पढ़ें: आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व वाले लेट्स फिक्स अवर फूड कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को लेकर नीति सुझाव जारी किए

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share