महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल को पद्म सम्मान मिलने से विपक्ष नाराज़ क्यों?
पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर विपक्ष नाराज़ है। उनका कहना है कि कोश्यारी के कार्यकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा।
महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने को लेकर विपक्षी दलों में नाराज़गी देखी जा रही है। कोश्यारी ने लगभग तीन साल पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन बतौर राज्यपाल उनका कार्यकाल अब भी विपक्षी नेताओं की स्मृति में ताज़ा है, जिसके चलते वे इस सम्मान का खुलकर विरोध कर रहे हैं।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने महाराष्ट्र में “लोकतंत्र और संविधान की हत्या” की और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, कोश्यारी के कदमों के बाद ही एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने।
कोश्यारी का राज्यपाल कार्यकाल (सितंबर 2019 से फरवरी 2023) कई विवादों से घिरा रहा। नवंबर 2019 में हुए शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी, जिसकी सरकार मात्र तीन दिन चली। इसके बाद जून 2022 में फ्लोर टेस्ट के निर्देश को लेकर भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और शिवसेना दो धड़ों में बंट गई।
कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने भी इस सम्मान का विरोध किया है। कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने अपने कार्यकाल में छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे महापुरुषों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को इतना बड़ा सम्मान दिया जाना दुखद है।
वहीं, कोश्यारी ने विवाद को खारिज करते हुए कहा कि वे प्रशंसा या आलोचना के लिए काम नहीं करते और राष्ट्रसेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं। भाजपा नेताओं, खासकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ने उनके सम्मान का समर्थन करते हुए कहा कि देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान उचित है।
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