300 वर्षों बाद भारत लौटीं चोल कालीन ताम्रपत्र पट्टिकाएं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- इन्हें देखकर गहरा आकर्षण महसूस हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 300 वर्षों बाद नीदरलैंड से भारत लौटी 11वीं शताब्दी की चोल कालीन अनैमंगलम ताम्रपत्र पट्टिकाओं को देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक चोल कालीन ताम्रपत्र पट्टिकाओं (अनैमंगलम ताम्रपत्र) की भारत वापसी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन दुर्लभ धरोहरों को देखकर उन्हें गहरा आकर्षण और गर्व का अनुभव हुआ है। ये ताम्रपत्र 300 वर्षों से अधिक समय तक नीदरलैंड में रहने के बाद हाल ही में भारत वापस लाई गई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि ये ताम्रपत्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी धरोहरों की वापसी न केवल देश के इतिहास को संरक्षित करने में मदद करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करती है।
अनैमंगलम ताम्रपत्र चोल साम्राज्य के शासनकाल से संबंधित हैं और इन्हें ऐतिहासिक दस्तावेजों के रूप में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन ताम्रपत्रों में उस समय के प्रशासन, भूमि अनुदान, सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। इतिहासकारों के अनुसार, ये दस्तावेज दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल शासन की प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
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भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से विदेशों में मौजूद भारतीय सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी अभियान के तहत कई प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और ऐतिहासिक वस्तुएं विभिन्न देशों से वापस लाई जा चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी भारतीय इतिहास और पुरातत्व के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे शोधकर्ताओं को चोल काल के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया और इस उपलब्धि से जुड़े सभी लोगों की सराहना की।